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कल, आज और कल...

कहते बाबा –
प्रात: उठकर ‘पाय लागूं’ बड़ों को,
कहते पापा-
मंजु महिमा
गुड मोर्निंग सभी छोटे बड़ों को,
कहते यह नन्हे-
हाय! डेड-मोम ब्रो सभी को.
कहते बाबा –
भाखरी-गुड़ सबसे पौष्टिक खाना,
कहते पापा-
ब्रेड-बटर, सूप-सेंडविच बढ़िया खाना,
कहते नन्हे –
पास्ता, नूडल और पीज़ा,
नहीं इससे स्वादिष्ट दूजा.
कहते बाबा-
दूध-दही की लस्सी जैसा कोई पेय नहीं.
कहते पापा-
फलों के जूस, चाय-कॉफी,कोला जैसा कोई पेय नहीं.
कहते नन्हे-
पेप्सी,कोको,चाकलेट,सोडा,फ्रूटी जैसा कोई ड्रिंक नहीं.
कहते बाबा-
घोड़ा-गाड़ी, बग्घी जैसी अन्य कोई सवारी नहीं.
पापा कहते-
टाटा सूमो और वायुयान का कोई सानी नहीं,
नन्हे कहते-
खड़ा हेलीकोप्टर छत पर मेरी,
सड़कों पर कोई जगह खाली नहीं.
बाबा कहते-
जाएँगे आज सिनेमा, हो जाओ तैयार सभी,
पापा कहते-
वीडियो पर देखेंगे फिल्म घर में,आजाओ सभी,
नन्हे कहते-
देख ली मैंने मोबाइल पर चलते फिरते,
आप लोग भी मोबाइल पर देख लो अभी.
समय बदलता पीढ़ी दर पीढ़ी,
जाती हैं बदल परम्पराएं भी,
बदलता रहता रहन-सहन और
बदल जाता तरीका सोच का भी.
बदल भले ही जाएँ भौतिक साधन,
पर न बदल पाएँ जीवन मूल्य कभी.
यही हमें रखेंगे जीवित जान लें सभी.




 यह रचना मंजु महिमा भटनागर जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी प्रकाशित रचनाओं में काव्यसंग्रह– हिन्दी- (1) बोनसाई संवेदनाओं के सूरजमुखी (2) शब्दों के देवदार 3) हथेलियों में सूरज (सद्य प्रकाशित )  ,शोध प्रबंध–प्रकाशित-  (1) संतकवि आनंदधन एवं उनकी पदावली .आपको   हिन्दी साहित्य अकादमी गुजरात द्वारा श्रेष्ठ शोध-प्रबंध हेतु पुरस्कार , रजत पदक - डॉ. काबरा काव्य स्पर्धा में प्रथम पुरस्कार-हिन्दी साहित्य परिषद, अहमदाबाद आदि विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है . संपर्क सूत्र - ईमेल : manjumahimab8@gmail.com ,चलित-भाष-09925220177

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