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खुशी के आँसू 

कैसे उदासी के आलम में डूबे हो
जरा हस भी लिया करो
खोलकर अपने दिल के राज
जरा सा मुस्कुरा भी लिया करो

मत दबाओ उनको अब
कमलेश संजीदा
बुरे वक़्त भी एक दिन हवा हो जायेंगे
जिस दिन जम कर खड़े हो जाओगे
तूफान भी रस्ते बदल जायंगे

चालें  सब थम जाएँगी
रस्ते सब साफ़ हो जायेंगे
तेरे इन्तजार में रूककर
वक़्त के पहिये भी थम जायेंगे

एक बार अगर रुख कर ले तूं
सब चमन खिल जायेंगे
बहार बनकर चारों तरफ
खुशहाली फेह्ला जायेंगे

फूलों  के हर गुलशन -२
चारों तरफ जब खिल उठेंगे
ख़ुशी  के आँसूं  आँखों से
बहकर एक दिन तो निकलेगे


यह रचना कमलेश संजीदा उर्फ़ कमलेश कुमार गौतम  जी द्वारा लिखी गयी है।  आप १९८७ से कविता, गाने, शायरी,लेख,कॉमिक्स , कहानियां लिख रहें  हैं।   अब तक आपने  लगभग ५०० कवितायेँ ,५००- गाने ,६००- शायरी ,३-कॉमिक्स, २०-कहानियाँ लिखें हैं। संपर्क सूत्र -  कमलेश संजीदा उर्फ़ कमलेश कुमार गौतम  अस्सिटेंट प्रोफेसर - डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर ऍप्लिकेशन्स , एस. आर. एम यूनिवर्सिटी  एन. सी. आर. कैंपस मोदीनगर, गाज़ियाबाद , उत्तर प्रदेश  मोबाइल नंबर. ९४१०६४९७७७ ईमेल. kavikamleshsanjida@gmail.com

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