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तहलका

"आरक्षण" इस शब्द ने तो तहलका मचा दिया | इसी शब्द ने नहीं "दलित " इसे कैसे भूल सकते है | कुछ नेताओं की कुर्सी पर लगी गद्दी भी तो ऐसे ही शब्दों के तालमेल से बने है , तो कुछ लोगो का रोटियों को सेंकने का ईंधन | है न मजेदार शब्द |
             
जयश्री जाजू
 अब मेरा तो मानना है कि देश में कुछ कमी की भरपाई इन शब्दों मात्र से ही हो जाएगी | जैसे खाने की समस्या का समाधान, रात में  चैन की नींद सोने के लिए नरम गरम बिस्तर | अब आप सोच रहे होंगे कि भला खाने की समस्या का समाधान कैसे? भई महंगा सिलेंडर नहीं खरीदना पड़ेगा और देश की भी भलाई, पेड़ की कटाई कम |
                मेरा तो मानना है कि सबसे बड़े देशभक्त तो वो है जो ऐसे शब्दों से देश में तहलका मचा देते है | इतने बड़े देश में ख्याति प्राप्त करने के लिए न जाने कितने जुगाड़ करने पड़ते होंगे | अरे नहीं जी आजकल प्रसिद्ध होना बाएँ हाथ का खेल है | बस कुछ ऐसे शब्दों का (ऊपर मैंने आपकी सहूलियत के लिए उदाहरण दिया है ) प्रयोग करों और देखो प्रसिद्धि हवाई जहाज से भी तेज दौड़ी चली आएगी |
         अब अगर इससे भी मन नहीं भरता है तो देश के विरोध में ही कुछ बोल दो | वैसे भी आजकल यह चलन काफ़ी चल पड़ा है | गणतंत्र देश के निवासी को कुछ भी अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता है | भई हमारा देश गणतंत्र है | अब आप पूछोगे ये गणतंत्र है तो, बडी सीधी बात है, कहीं भी खड़े - खड़े थूक दो और कहीं भी खड़े-खड़े लघुशंका कर दो |  यदि कोई टोकता है तो अनशन पर बैठ जाओ | मिडिया आ गई, दिनभर टी.वी. पर छाए रहोगे | मिल गई प्रसिद्धी, है न बाएँ हाथ का खेल |
       अब विद्यार्थी वर्ग भी इससे अछुता क्यों रहे | भई वो भी तो अपने विचारों को अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता रखता है | अब यह वर्ग तहलका कैसे मचाए | बड़ा आसन तरीका है जी, बस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दामन थामों और किसी एक पार्टी की ( राजनैतिक पार्टी ) की धज्जिया उड़ा दो बस देखो मजा | हो गए न आप प्रसिद्ध और मचा दिया तहलका |
          भई हम तो एक ही बात समझते है कि आजकल एक आम आदमी रह-रह कर ऊब गए है | जिंदगी में थोड़ा मसाला चाहिए, बस इस तरह का तहलका मचाकर दो फ़ायदे कर लेते है | अब आप फिर से कंफुय्स हो गए | हाँ भई दो फायदे एक तो प्रसिद्धी मिल जाती है और दूसरा आने वाले दिनों में किसी पार्टी का टिकट | तो है न फ़ायदे वाली बात | और आपको क्या करना है देश के विरोध में, पार्टी के विरोध में कुछ भी बोल दो, लो मच गया तहलका | प्रत्येक अखबार की सुर्ख़ियों में, टी.वी. पर प्रत्येक नागरिक का गप्पे मरने का विषय भी आप ही हो जाओगे | तो कमर कस लो और तैयार हो जाओ | भई मैं तो चली अगर आप भी आना चाहो तो ............ |


यह रचना जयश्री जाजू जी द्वारा लिखी गयी है . आप अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं . आप कहानियाँ व कविताएँ आदि लिखती हैं . 

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  1. बढिया है आजकल चारों ओर यही दिखाई दे रहा है |

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