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ओरी ! सखी फाल्गुन मदमस्त 


ओरी ! सखी
फाल्गुन मदमस्त
चलो खेलें होली I
हुड़दंग गलियों में
उड़ रहे रंग
पिचकारी रंग बिरंगी
हो गई मतवाली
अचूक छोड़ती
रंग हरा,नीला
उनके बाल हो गए सुनहरे
गाल गुलाल I
ओरी ! सखी
फाल्गुन मदमस्त
चलो खेलें होली I
सजा लिए रंग हाथों में
मैंने गुलाल रेशमी
मन विचलित माने न
पिया ने भी कर दी
चूनर गीली
कोयलिया मन की कूके
भूल सारी नफ़रत
प्रेम रंग खेलें आ !
ओरी ! सखी
फाल्गुन मदमस्त
चलो खेलें होली I

यह रचना अशोक बाबू माहौर जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी है . आप लेखन की विभिन्न विधाओं में संलग्न हैं . संपर्क सूत्र -ग्राम - कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ,  ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com

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