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    चाँद हमारा पूनम का

देखो सबको मन चाहा लगता , चाँद हमारा पूनम का,
भूखे को लगे रुमाली-रोटी, गरीब को रुपया चाँदी का।
नन्हे को लगे सफेद गुब्बारा टंगा उड़ रहा आकाश में,
नन्ही कहे वेनिला-आइसक्रीम, खा जाएं पकड़ हाथ में ।
सेठ बताए कलदार इसे तो, सेठानी बोले यह तो चाँदी का थाल है,
बेटा कहे यह बॉल है टेनिस की, बिटिया कहे बुढिया के बाल हैं।
बंगाली कहता ये तो हंडी का रसोगुल्ला,मलियाली कहता इडली है,
पंजाबी कहता माखन का लोंदा, गुजराती कहता मुट्ठी भात है।
दादी कहती मेवे डला अमृत-- खीर कटोरा है यह ,
दादा को लगता अपनी प्यारी पोती जैसा गोरा यह ।
मुझको लगता क्रीम लगा केक, हर साल जन्मदिन मनाता यह,
सबके मन को खूब ही लुभाता , पूर्णमासी का चन्दा यह ।




यह रचना मंजु महिमा भटनागर जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी प्रकाशित रचनाओं में काव्यसंग्रह– हिन्दी- (1) बोनसाई संवेदनाओं के सूरजमुखी (2) शब्दों के देवदार 3) हथेलियों में सूरज (सद्य प्रकाशित )  ,शोध प्रबंध–प्रकाशित-  (1) संतकवि आनंदधन एवं उनकी पदावली .आपको   हिन्दी साहित्य अकादमी गुजरात द्वारा श्रेष्ठ शोध-प्रबंध हेतु पुरस्कार , रजत पदक - डॉ. काबरा काव्य स्पर्धा में प्रथम पुरस्कार-हिन्दी साहित्य परिषद, अहमदाबाद आदि विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है . संपर्क सूत्र - ईमेल : manjumahimab8@gmail.com ,चलित-भाष-09925220177

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