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और भरोसा टूट गया  (लघु कथा ) 

आज सुमति का स्कूल में साक्षात्कार हुआ और उसक चयन हो गया | घर आकर उसने सभी को खुश खबरी दी | सभी खुश थे कि सुमति का चयन शहर के एक बहुत बड़े विद्यालय में हो गया | उसने डेमो कक्षा दसवीं कक्षा के लिए दी थी | जून से उसे नौकरी पर चढ़ना था | वह तो यही सोचे हुए थी कि उसे दसवीं कक्षा ही पढ़ाने के लिए मिलेगी,लेकिन जब वह जून में स्कूल आई तो उसे उच्च कक्षाओं के बजाय माध्यमिक कक्षाएँ दी गई | खैर उसे
जयश्री जाजू
नौकरी की आवश्यकता थी इसलिए उसे स्वीकार करना पड़ा | समय अपनी गति से आगे बढ़ रहा था | सुमति की इंचार्ज सुविधा थी | सुमति और सुविधा इन दोनों में प्रगाढ़ता बढ़ने लगी | सुविधा सदैव सुमति के कार्यों की प्रशंसा करती थी तो सुमति ने इसी आशा में विद्यालय में दो-चार साल निकाल दिए कि "वह उसे आगे बढाने का प्रयत्न जरुर करेगी |"
          एक दिन की घटना ने सुमति के विश्वास को खंडित कर दिया | हुआ यह था कि स्कूल के प्रधानाचार्य जी ने सुमति को बुलाकर कहा कि " हम आपके काम से बहुत प्रसन्न है इसलिए आने वाले समय में हम आपको उच्च कक्षाएँ देना चाहते है |" समयाभाव के कारण सुमति ने सुविधा को यह बात नहीं बताई |  प्रधानाचार्य जी ने स्वयं ही इस बात का जिक्र सुविधा से कर दिया |  सुविधा ने उस समय प्रधानाचार्य जी से क्या कहा पता नहीं | तीसरे दिन प्रधानाचार्य जी ने सुमति को बुलाकर कहा कि " मैंने जो उच्च कक्षाओं के बारे में कहा था , वह अब मैं  नहीं दे पाऊँगा,आप पहले की तरह  माध्यमिक कक्षाएँ ही पढाओगी |" सुमति के "क्यों" पूछने पर प्रधानाचार्य जी ने कहा कि "आप उच्च कक्षा पढ़ा नहीं सकती क्योंकि आपने क्षमता नहीं है |" यह सुनकर सुमति के पैरों तले  जमीन खिसक गई |


यह रचना जयश्री जाजू जी द्वारा लिखी गयी है . आप अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं . आप कहानियाँ व कविताएँ आदि लिखती हैं . 

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  1. "और भरोसा टूट गया" ये लघु कथा अच्छी लगी आशा करते हैं की सभी वाचको को जरुर पसंद आयेंगी.
    Great Efforts, God bless you…Keep it up!!!!

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  2. अंतर की बातों का सफलतम चित्रण...

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  3. बहुत सुदर सभी तो 1 बार जरूर पढना चाहिये

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