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किताबों के बोझ से
1.किताबों के बोझ से
मर रहा है बच्‍चा
घरों में सड़कों पे स्‍कूलों में
ज्ञान के बोझ से
मर रहा है बच्‍चा
मेरे भीतर का
खतरेमें है संतुलन
लक्षमी नारायण अग्रवाल
खतरे में है स्‍थिरता


2.मिलकरज्ञानऔर उसके साथियों ने
कर दिया है बलात्‍कार
प्रेम का
रिश्‍ते जिंदा तो हैं
पर
कुछ बोलतेनहीं
बलात्‍कार पीड़िता की तरह


3.चंट नहीं है जो
जो मन का बिलकुल सच्‍चा है
उस हिन्‍दूसे हीहिन्‍दुस्‍तान
सारे जहॉ से अच्‍छा है

4.नहींदेखनी पड़ी मुझे
आजाद भारत की संसद
नाथू राम गोडसे
तेरा बहुत बहुत शुक्रिया


5.थक जाओगे
बन्‍दूक के बोझ से
रख दोइसे
ले लो हाथ में फूल
कभी नहीं थकोगे

6.हो गया है
भयंकर जलवायु परिवर्तन
विधानसभाएं
लोकसभाएं
गरजती तो हैं
पर अब
बरसती नहीं हैं।



यह रचना लक्ष्मी नारायण अग्रवाल जी द्वारा लिखा गयी है.आपकी मुक्ता,गृहशोभा,सरस सलिल,तारिका,राष्ट्र धर्म,पंजाबी संस्कृति,अक्षर ,खबर ,हिन्दी मिलाप पत्र -पत्रिकाओं आदि में प्रकाशन। कई कहानियाँ व व्यंग्य पुरस्कृत । कई बार कविताएं आकाशवाणी और दूरदर्शन से प्रसारित हो चुकी है ."आदमी के चेहरे'( कविता संग्रह ) 1997, "यही सच है'(कविता संग्रह) 1998 आदि आपकी प्रकाशित रचनाएँ हैं . सम्पर्क सूत्र - घरोंदा, 4-7-126, इसामियां बाजार हैदराबाद -500027 मोबाइल - 09848093151,08121330005, ईमेल –lna1954@gmail.com

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