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अहसासों के सागर में.... 
जीवन के विविध पड़ावों का धुंधलका मस्तिष्क में छाया हुआ है | कभी मेरे भीतर बसी दुनिया के बचपन में पंहुच जाती हूँ, कभी ‘टीनएज’ में, कभी २५ पार तो कभी ३५ के बाद की दुनिया भी दिखाई देने लगती है | हर बार कोई एक पड़ाव हावी होने लगता है.. और कमाल की बात यह है कि शुरुआत सदैव आज से होती है | कोई किताब पढ़ते हुए या चुपचाप लेटे हुए बीते वर्षों की यात्रा पर कब निकलना होता है पता ही नहीं चलता | 
भावना  मल्होत्रा 
आज अपने आस-पास जब ऊर्जा से पूर्ण युवाओं (१५ से २५ बरस) को देखती हूँ तो याद आते हैं वह दिन जब हम उस वय में थे | २५ वर्ष की आयु तक हम भी जोश से सराबोर रहा करते थे | लगता था कि दुनिया की कोई ताकत हमें डिगा नहीं सकती | है किसी समस्या में दम तो हमसे टकरा देखे | उम्र की राह पर आगे बढ़ते हुए छोटे-बड़े अहसास कितनी गहराई से मन मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं, इसका अनुभव केवल मुझे है या मेरे हम उम्र सभी लोगों को यह जानने को मन सदैव विचलित रहता है | 
सामान्यतः कहा जाता है कि लड़कियों/स्त्रियों की उम्र नहीं पूछते | मैं हमेशा सोचती थी कि उम्र बताने में ऐसी कौन सी समस्या आती होगी ? २५ के हों या ३५ के...फर्क क्या पड़ता है ? लेकिन धीरे-धीरे ज्ञात हुआ कि क्या फर्क पड़ता है | जब एक व्यक्ति अपने भीतर की ऊर्जा, उत्पादकता को डिगते हुए महसूस करता है.. जब चाह कर भी उस जोश को एकीकृत नहीं कर पाता जो एक खास उम्र तक कूट-कूट कर भरा था...फर्क तब पड़ता है | जीवन में होने वाले हर छोटे परिवर्तन का अनुभव करना..अपने भीतर होते बदलावों को महसूस करना, फिर समझना, फिर स्वीकार करना वाकई कठिन काम है | अब समझ आता है कि खुद को बदलने की ज़रूरत क्यूँ पड़ती है ? 
मैं जानना चाहती हूँ कि मेरी वय, मेरी स्थितियां केवल मेरी हैं या मेरे जैसे सभी साथियों की | हमारे समाज में होने वाले परिवर्तनों के परिणामस्वरूप हमारे जीवन में जो परिवर्तन आ रहे हैं उन्हें स्वीकारने के लिए किस चीज़ की आवश्यकता है ? इस भागदौड़ भरे जीवन में ‘जीने’ को छोड़कर हम सब कुछ करते हैं | आखिर क्यूँ ? मुझे विश्वास है कि मेरी बात से बहुत से लोग इत्तेफ़ाक रखते होंगे..लेकिन उसे स्वीकारने की हिम्मत सब शायद नहीं जुटा पाते | यह हिम्मत साथ आने से बढ़ सकती है और असहिष्णुता, नफ़रत, स्वार्थ भरे माहौल में शायद सहिष्णुता, भाईचारे सौहार्द्र का माहौल बनाना भी संभव हो सकता है | अहसासों के सागर की पहली बूँद यहाँ साझा कर रही हूँ | प्रतिक्रियाओं और साथ आने की उम्मीद में.....  


यह रचना भावना मल्होत्रा जी द्वारा लिखी गयी है . आप भारतीय भाषा केंद्र, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय दिल्ली में शोधार्थी (हिंदी) हैं .  

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  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 24 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    1. रचना को पसंद करने और "पाँच लिंकों का आनन्द में" लिंक करने के लिए बहुत धन्यवाद | :)

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  2. आपकी लेखनी में स्पष्टता है.
    भाषा का प्रवाह वाकई काबिल ए तारीफ है...
    भावों की रचनात्मकता बहुत ही उत्तम है.
    laxmirangam.blogspot.in

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    1. बहुत शुक्रिया सर.. आपकी टिप्पणी उत्साहवर्धक है | प्रयास आगे भी जारी रहेगा | सुझाव आमंत्रित हैं |

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