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वृक्ष की दास्तान

काश कोई मेरे दुख को समझे ...
क्या गुनाह है मेरा तू बता दे मुझे
क्या गुनाह है मेरा ....
मैंने तो की है तेरी ही सेवा
क्या गुनाह मेरा तू बता दे मुझे
तू लेकर कुल्हाडी काहे काटे मुझे
मैंने तो की है हर रूप में तेरी ही सेवा
फिर क्यों है काटे तू मुझे
क्या गुनाह मेरा.....
तू चले धूप में जब थककर हो जाता चूर है तब
मेरीनही छाॅव में पनाह लेता है।
फिर क्यों है काटे तू मुझे
राहुल यादव 
क्या गुनाह है मेरा ....
मैंने तुझको फल है दिया फूल भी दिये
लकडियाँ वानस्पति औषधियाँ भी दी हैं तुझे
मैंने तुझको शीतल वायु जीने का आस्तित्व दिया
ऐ स्वार्थी इन्सान फि भी तू मुझको काटे है।
क्या गुनाह है मेरा ....
मैंने तो की है हर रूप में तेरी ही सेवा....
काश कोई मेरे दुख को समझे ...

यह रचना राहुल यादव जी द्वारा लिखी गयी है . आप आगरा में रहते है व कवितायेँ लिखते हैं . 

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  1. bahut khub
    isme ped jaise nivedan kar raha hai
    aisa kuch likhe ki man ko jagrit kare
    jaise...
    maine tujhe hawa diya aur tu mujhe rahne nahi de raha
    waqkt mera bhi ayega yahi sanso ke liye mujhe bulayega

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut khub
    isme ped jaise nivedan kar raha hai
    aisa kuch likhe ki man ko jagrit kare
    jaise...
    maine tujhe hawa diya aur tu mujhe rahne nahi de raha
    waqkt mera bhi ayega yahi sanso ke liye mujhe bulayega

    उत्तर देंहटाएं
  3. मैंने तुझको शीतल वायु जीने का आस्तित्व दिया
    ऐ स्वार्थी इन्सान फि भी तू मुझको काटे है।
    क्या गुनाह है मेरा ....(भावपूर्ण

    उत्तर देंहटाएं

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