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बिहार में लालूराज
हे बिहार! एक समय था बिहार में लालूराज का। कुछ लोग जो मस्ती और जल्दी में होते है जंगलराज भी कह देते
है। पर जैसा भी था समझ लीजिये अज़ीब जैसा ही था।उनदिनों का एक वाकया याद है सो सुनाता हूँ- बिहार के किसी एक सुदूर गाँव के छोटे नुक्कड़ पर, एक दफ़ा कुछ लोगबाग बैठे बतीया रहे थे कि भईया ई लालू जी हमलोगों के खातिर कुछो(कुछ भी) जो किये होते। बताइये, इतना दिन हुआ आज तक हमलोगन के गाँव में बिजली, स्कूल, अस्पताल तो छोड़िये एगो(एक) सड़को जो बनवाये होते.. वह कह रहे थे और सब गंभीरतापूर्वक सर हिला-हिला कर सुन रहे थे। कि इतने में लगभग चिल्लाते हुए, गुस्से में हाथ जोड़ कर एक भईया जी ने माफ़ी मांगने के लहजे में कहा कि कुछो हो जाये, अबकि लालू सरकार कितनों(कितना भी) कहे भोट(वोट) नहीं देंगे। सब सर हिला कर बुझे मन से कहते है हाँ हाँ नहीं देंगे। तभी धूल उड़ाती उजली गाड़ियों से कुछ उजले नेता उतरते हैं और लालू जी की क्या बात कही जाये वो तो उनमे से साक्षात् प्रकट ही होते है। सब लोगबाग खड़े हो जाते है। कौनों चमचा-बेलचा जोर से ऊँची आवाज़ में नारा लगा देता है- लालू जादव जिंदाबाद.. सब लोगबाग भी हाथ उठाकर चिल्लाते है-जिंदाबाद-जिंदाबाद।
हाथ उठाकर सबको चुप करवाते-आशिर्वाद देते लालू जी जाकर बैठ जाते है सबसे ऊपर वाले मचान पर और खिसियाकर पूछते है- का रे ई सब का चल रहा है? हमरे ख़िलाफ सुने है माहौल बना रहे हो? जनता में से एक छुटपुट नेता उठा और जनता के तरफ़ देखते हुए लालू जी से कहने लगा -कि नाही अइसन कउनो बात नाही है ऊ हमलोगन बिचार(विचार) बनावत हैं कि अपन गाम के इतना दिन में कउनो बिकास(विकास) नहीं होल है (सर झुका कर धीरे से) सो अबकी आपको भोट नहीं दे पाएंगे। लालू जी- रे का नाम है तोहार, आ ई बताओ का बिकास होइके चाही जो नाही हुआ है?? जनता में से एक बुजुर्ग उठकर- अइसे तो बहुते कुछो है बताबे खातिर पर औरों को छोड़िये एगो रोड तक भी आप नहीं बनवाएं है। लालू जी जोड़ से हँसते हुए- हे रे बुड़बक ई बात है? तो लो हम कले(कल ही) रोड बनवा देते है आर वो भी खूब चमचम। पर फिर जब पोलिस आयेगी(सख्त आवाज़ में)और उठाकर जेल में बंद कर देगी तो कोई हमको कुछ नहीं बोलेगा। कोई नहीं कहेगा पोलिस हमको जेल में डाल दिया है निकालो। (अचानक से)जनता घबराई हुई एक आवाज़ में अरे नहीं-नहीं आप नाराज़ काहे होते है। मत होइये। हमलोगन को उतना समझ नहीं है आप नहीं बनवाते है तो कउनो कारण ही होगा। जेल नहीं जाना हमलोगन को, ऊ तो बस खाली दिमाग का जानबे करते है कुछु-कुछु सोचता रहता है। निश्चिन्त रहिये हमलोग आप ही को भोट करेंगे। लालू जी-हम्म! फिर भीड़ घर के तरफ़ लालू जी राजधानी के तरफ़। यह एक दौर था जनता बनती रही, सरकार बनाती रही। जनता ने फिर एकबार लालू जी को सर्वाधिक स्नेह दिया है पर इस बार लालू चाणक्य जैसे है, चन्द्गुप्त है नितीश। महागठबंधन ने बिहार को फिर मुहाने पर खड़ा कर दिया है। बिहार की दशा-दिशा लालू-नितीश के ही संयुक्त हाथों में है। महागठबंधन के साथ सरकार चलाना चुनौतीपूर्ण रहेगा दूसरी तरफ बिहार का भला और बुरा दोनों बराबर संभावित है। हम तो भला ही चाहेंगे सो भला ही हो। शुभकामनायें बिहार!!



यह रचना संजय झा जी द्वारा लिखी गयी है . आप आजीविका वृद्धि एवं महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से प्रोजेक्ट एग्जीक्यूटिव के पद पर गैर सरकारी संस्था सृजन के साथ आदिवासी परिवारों के मध्य छत्तीसगढ़, कोरिया में कार्यरत हैं . संपर्क सूत्र - केल्हारी, कोरिया, छत्तीसगढ़। M-9098205926 Email-Sanjaykshyapjha@gmail.com. 

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