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बेटी की पुकार....

मुझको दुनियां में आने दो
मुझको भी जीवन पाने दो
तुम मेरे मम्मी-पापा हो
मुझको घर अपने आने दो

मै खुशियां लेकर आऊँगी
मै आप का नाम बढ़ाउगी
मै बनकर प्यार तुम्हारा
सुन्दर संसार बनाउगी
मेरी बगिया भी खिलने दो
मुझको भी जीवन मिलने दो
तुम मेरे मम्मी-पापा हो
मुझको घर अपने आने दो

बेटी को देवी कहते हो
फिर क्यों तुम हिंसा करते हो
भगवान ने हमको भेजा है
फिर तुम क्यों बाधा बनते हो
मेरा जीवन भी संवरने दो
मेरा जीवन भी महकने दो
तुम मेरे मम्मी-पापा हो
मुझको घर अपने आने दो

मै एक कली तेरे बगिया की
योगेश पाण्डेय
मै एक स्वप्न तेरे निदिया की
तुम मुझको भी अपनालो ना
मै एक फोटो तेरे बचपन की
मुझे तेरी निशानी बनने दो
मुझको एलबम में आने दो
तुम मेरे मम्मी-पापा हो
मुझको घर अपने आने दो

मै शिक्षा का आधार बनूँगी
तेरे बागों की बहार बनूँगी
मै जिस घर में भी जाऊँगी
तुम दोनों का ही प्यार बनूँगी
अब बेटी को भी पढ़ने दो
बेटी को भी आगे बढ़ने दो
तुम मेरे मम्मी-पापा हो
मुझको घर अपने आने दो


   यह रचना योगेश पाण्डेय जी द्वारा लिखी गयी है . आप स्वतंत्र रूप से लेखन कार्य में रत है . संपर्क सूत्र - फोन नं.- 07060756956 , ई-मेल: ypandey9@gmail.com                     

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