2
Advertisement
संघर्ष

‘रे पथिक! ये क्षण विश्राम का नहीं,
जीवन का नाम आराम नहीं।
सचेत हर पल रहना तुझे,
आघात-संघर्षों के अनवरत सहना है तुझे।
अवरूद्ध पथ के कण्टक
अपने ही हाथों बीनने हैं, तुझे।

ये जो गहन अंधकार है
कालिमा रात की,
उसमें स्वर्णिम उषा की
लाली भरनी है तुझे।
उठो स्व-पथ का निर्माण करो,
जीवन-दीपक को ज्ञान-ज्योति प्रदान करो।‘

‘नहीं! मैं अब कुछ नहीं कर सकता
मैं थक गया हूं- चलते-चलते,
टूट गया हूं- थपेड़े सहते-सहते,
मुझमें अब सामर्थ्य नहीं, कि
अवरूद्ध-पथ के कण्टक बीन सकूं।
नहीं, मैं अब कुछ नहीं कर सकता।‘

‘बटोही! क्यों हताश तुम क्यों हो निराश?
यह जीवन है - एक कर्म क्षेत्र
नई दुनिया देखने की यदि है ललक,
तूफान भी सहने पड़ेगे, थपेड़े ही नहीं,
खोजने होंगे नवीन अंतरिक्ष।

नया उत्साह नयी प्रेरणा
ऐसे संचरित रहना हर पल तुझे।
यही वह पथ जिस पर हैं -
प्रतीक्षारता रूपसी नवयौवनाएं
अपने आंचल से तेरे पगों-
की धूल पोंछने को।
अपने कोमल हाथों से
तेरे चरणों के कण्टक निकालने को।
अपनी गोद में तेरे लहूलूहान
चरण समेटे लेने को।
तेरी मंजिल-तेरी प्रेयसी,
की बाहों में पहुंचने को।
देख! तेरी मंजिल
तेरी प्रेयसी बाहें फैलाए
खड़ी है आतुर, तुझे
अपने में समेट लेने को।‘

‘हे! सचेतक तुम कहां हो?
मेरा स्वीकार करो नमन!
हे! पथ प्रदर्शक! तुम कहां हो?
मैं अब नया जोश, नयी स्फूर्ति
अनुभव कर रहा हूं।

नहीं चाहता अब विश्राम मैं,
नहीं परवाह मुझे तूफानों की,
न ही परवाह है कण्टकों की।
मिटा दूंगा भोर की लाली से
रात्रि की कालिमा को।
कर दूंगा आप्लावित
सर्वत्र ज्ञानलोक!
हे! मेरे प्रेरणादायक!
स्वीकार करो नमन!
पुनः एक बार
पूर्व इसके कि करूं मैं गमन।‘



यह रचना मुकेश पंडित जी द्वारा लिखी गई है।आप कहानी, कविता तथा विभिन्न विषयों पर फिचर लेखन  करते हैं । आपके विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 11 से ज्यादा कविता तथा आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। संपर्क सूत्र - ई-मेल -  panditmukesh2020@gmail.com  ब्लॉग – MotivationalStoriesinHindi.in

एक टिप्पणी भेजें

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 30 अक्टूबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top