3
Advertisement
किताबों के ढेर

किताबों के ढेर
विशाल ,
लगे मैदान में
जगह जगह
चारों तरफ अलौकिक
अद्भुत अंदाज में।
हजारों ,लाखों ,करोड़ों पन्ने
भरे पड़े
शब्दों से
संस्कृति और सभ्यता से
पठन,पाठन करते लोग
होते एक जुट
बहाते गंगा
छिड़कते गंगाजल
समाज में छिपी
कुरीतियों ,कलंकित नीतियों पर
परेशानियों,हाँफती चालों पर।
किताबों के ढेर
सरताज सभ्यता के
महान हैं
अशोक बाबू माहौर
साहित्य का सदद्वार हैं
ईमान हैं
पुलकित,खिलखिलाता
ज्ञान हैं
वफादार मित्र
ईस की शक्ति
चमत्कार हैं।


यह रचना अशोक बाबू माहौर जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी है . आप लेखन की विभिन्न विधाओं में संलग्न हैं . संपर्क सूत्र -ग्राम - कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ,  ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top