2
Advertisement
बस इतनी बात पर उसने हमें बलवाई

बस इतनी बात पर उसने हमें बलवाई लिक्खा है.
मुनव्वर राणा
हमारे घर के बरतन पे आई.एस.आई लिक्खा है..


यह मुमकिन ही नहीं छेड़ूँ न तुझको रास्ता चलते।
तुझे ऐ मौत मैंने उम्र भर भौजाई लिक्खा है..


मियाँ मसनद नशीनी मुफ़्त में कब हाथ आती है.
दही को दूध लिक्खा दूध को बालाई लिक्खा है..


कई दिन हो गए सल्फ़ास खा कर मरने वाली को.
मगर उसकी हथेली पर अभी शहनाई लिक्खा है..


हमारे मुल्क में इन्सान अब घर में नहीं रहते।
कहीं हिन्दू कहीं मुस्लिम कहीं ईसाई लिक्खा है..


यह दुख शायद हमारी ज़िन्दगी के साथ जाएगा।
कि जो दिल पर लगा है तीर उसपर भाई लिक्खा है..


विडियो के रूप में देखें -



मुनव्वर राणाएक प्रसिद्ध उर्दू शायर और कवि हैं। वें लखनऊ में रहते हैं। आपकी माँग़ज़ल गाँवपीपल छाँवबदन सरायनीम के फूलसब उसके लिएघर अकेला हो गयाकहो ज़िल्ले इलाही सेबग़ैर नक़्शे का मकान आदि प्रकाशित कृतियाँ है। आपको ग़ालिब अवार्ड 2005, उदयपुर ,डॉ. जाकिर हुसैन अवार्ड 2005, नई दिल्लीसरस्वती समाज अवार्ड 2004 आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है

सौजन्य - हिंदी विकिपीडिया  

एक टिप्पणी भेजें

  1. राणा जी की रचनायेँ सदा ही प्रेरणादाक रही हैँ। माँ के प्रति इनकी कृतियोँ मेँ जो प्रेम छलकता है उसे पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है मानो माँ का वात्सल्य प्रेम शायरी के हर मिसरे से टपक रहा हो ! ऐसे शायर को सादर नमन।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top