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केरल कार्टून जगत के महानायक बीएम गफूर
मूल लेख डाक्टर मृणाल चटर्जी
अग्रेजी से अनुवाद इतिश्री सिंह राठौर

बीएम गफूर
बीएम गफूर(4मई 1942 से 13नवंबर 2013) केरल के दिग्गज कार्टूनिस्टों में से एक तथा केरल कार्टून अकादमी के संस्थापक और कोझीकोड़ी में स्थित एनिमेशन कंपनी बीएमजी ग्रुप के संस्थापक निदेशक थे. कालीकट आर्ट गैलरी की संथापना में भी गफूर की महत्वपूर्ण भूमिका है. तीन सदी तक कार्टून जगत में उन्होंने कुंजम्मन जैसे कईं लोकप्रिय कामिक कार्टूम चरित्रों को नया आयाम दिया. गफूर का जन्म थैलासेरी में हुआ. उनके माता-पिता थिक्कोड़ी वैद्याराकाटू मुहम्मद कुट्टी हाजी और थैलासेरी वदेक्कांडी मरीयम्मा थे.
शिक्षा
 एमवी देवन की छत्रछाया में उन्होंने सेंट जोसेफ हाईस्कूल, कोझीकोड़े में पेटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त किया. चेन्नई सरकारी आर्ट एंड क्राफ्ट स्कूल में पढ़ाई करते समय प्रख्यात चित्रकर केसीएस पानिकर  भी उनकी प्रतिभा से काफी प्रभावित हुए .उस समय पानिकर स्कूल के प्रिंसिपल थे.
पेशा
उन्होंने दैनिक चंद्रिका से अपनी पेशेवर जिंदगी की शुरुआत की. उन्होंने नई दिल्ली में शंकर विक्ली में एक कमर्चारी के कार्टूनिस्ट के रूप में एक छोटी अवधि के लिए काम किया. इसके बाद वह कोझीकोड लौट आए और देशभिमान के साथ जुड़ गए. इमरजेंसी के दौरान उन्होंने अपनी स्वयं की पत्रिका निर्मला की शुरुआत के लिए देशभिमानी छोड़ दी लेकिन निर्मला ज्यादा समय तक टिक न पाई और बाद में वह कट-काट कार्टून पत्रिका के साथ शामिल हो गए. गफूर 1980 में मातृभूमि के साथ जुड़े. 2000 में मातृभूमि में अपने कायर्काल के दौरान उन्होंने एक वर्ष के लिए  एर्नाकुलम में नेस्ट कंपनी के साथ बतौर क्रिएटिव एनीमेशन निर्देशक के रूप में काम किया.
लोकप्रिय चरित्रों की रचना
मातृभूमि के साथ काम करके गफूर को अपनी  रचनात्मक दृष्टिकोणों को प्रसारित करने के बेहतरीन मौके मिले. उन्होंने कईं कार्टून चरित्रों की रचना की उनमें कुंजम्मन और टिंटुमान प्रमुख हैं. 1980 के बाद  मातृभूमि में प्रकाशित एक लोकप्रिय व्यंग्य कार्टून अंकल कुंज ने भी दिलों में राज किया.. प्रमुख चरित्र कुजम्मन एक आम आदमी था और वह भ्रष्टाचार और कदाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाता था. समकालीन केरल में इस कार्टून चरित्र ने सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर प्रभाव बनाने में सफलता प्राप्त की. बीएमजी एनिमेशन ने कैराली टीवी और इंडियन टेलीविजन पर बी.एम. गफूर की ‘कुंजम्मन’ की एक एनिमेटेड संस्करण प्रसारण किा जिसमें  2000 एपिसोड पूरे कर लिए हैं . टिंटुमान मलायलियों के लिए  लिए छोटे जॉनी के बराबर था  हालांकि यह प्रिंट माध्यम में इतना  लोकप्रिय नहीं हो पाया लेकिन  मोबाइल एसएमएस और ई मेल के माध्यम से वर्ष 2009 के दौरान लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गया. इसके  प्रकाशन के कॉपीराइट के मुद्दों को लेकर गफूर की  बीएमजी ग्रुप और दूसरी एनीमेशन कंपनी के बीच 2010 में एक कानूनी जंग छीड़ गई. बाद में गफूर की बीएमजी ग्रुप को इसका कापीराइट दिया गया और कंपनी ने टिंटुमान का एक एनिमेटेड संस्करण भी जारी किया
मृत्यु
इतिश्री सिंह
13 नवम्बर 2003 को  दिल का दौरा पड़ने से 61साल की उम्र में गफूर का निधन हो गया. उनके सम्मान में केरल सरकार  ‘गफूर स्मारक पुरस्कारम’ नामक एक वार्षिक पुरस्कार दे रही है. बी.एम. गफूर ने सुहारा से विवाह किया था. सुहारा से गफूर के चार बच्चे हैं जिनमें तंवीर गफूर और थातमल गफूर बीएमजी ग्रुप के निदेशक तथा प्रसारक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. प्रसिद्ध मलायालम लेखिका बीएम सुहारा उनक बहन थी.


यह लेख मूल रूप से डॉक्टर मृणाल चटर्जी ने लिखा है . इसका अनुवाद  इतिश्री सिंह राठौर जी द्वारा लिखा गया है . वर्तमान में आप हिंदी दैनिक नवभारत के साथ जुड़ी हुई हैं. दैनिक हिंदी देशबंधु के लिए कईं लेख लिखे , इसके अलावा इतिश्री जी ने 50 भारतीय प्रख्यात व्यंग्य चित्रकर के तहत 50 कार्टूनिस्टों जीवनी पर लिखे लेखों का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद किया. इतिश्री अमीर खुसरों तथा मंटों की रचनाओं के काफी प्रभावित हैं.

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