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उस ओर
पहाड़ी पर
कुछ उगा है
गोल मटोल
लाल सा,सुनहरा
ओढे चादर विशाल
समेटे बिस्तर
जैसे लग रहा है
कोई जगा है
नींद से
मुँह धोकर I
अनगिनत किरणों से
कर रहा है
रोशन
जग को
फैलाकर हाथ अपार
जलाकर
अद्तीय चिराग,
अशोक बाबू माहौर
उठाकर वीणा
बजा रहा है
खामोश,चुपचाप I
मुंडेर पर
बैठी चिड़ियाँ
चहचाहकर
सुना रहीं हैं
उसे गान
बजाकर मृदंग
पंखों से
पैरों से थिरककर I



यह रचना अशोक बाबू माहौर जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी है . आप लेखन की विभिन्न विधाओं में संलग्न हैं . संपर्क सूत्र -ग्राम - कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ,  ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com

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