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  माल खाना
          “ न इनसे दोस्ती अच्छी ,न इनसे दुश्मनी अच्छी " यह  बहुत  पुरानी  मिशाल  है .
मारते मारते  अमर बना देने  का   कर्तव्य ( करतब )  भी  ये जानते  हैं जेलों  का सुधार कुछ इस क़दर हुआ
कि  जेल जाना दागियों  के  लिए  शर्मिंदगी  की  बात  नहीं रही , इसलिए  अब   घोटालेबाज़ों  से  कानून बनाकर घपले  के  धन  की वापसी  के बारे  में  सोचना चाहिए  लेकिन  क्या कोई  बिल्ली अपने गले  में  घंटी बांधती देखी  है ?  . भला  किस  को  माल  से पसंदगी  न  होगी  ,  लेकिन  में  मालखाने  की  बात  कर  रहा हूं  जो  थाने  के  कुछ अंदर ,   तो कुछ बाहर 
यथा दुर्घटना के बाद  लंबित मामलों  की थाने में रखी  कार और  अन्य मोटर साइकिलें  ( मेटेरियल एवीडेंस ) इस  माल   को  बजाए  सडाने  के ( चूकि मामलों  के  विधिक रूप  से निपटारे तक ) इस सामग्री  को रखना ही है  तब  क्यूं  न  कोई  अन्य वैज्ञानिकव अन्य  देशों  में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का अनुसरण कर लिया  जाए  कि  इस  की  वीडियो फूटेज  को  उसी  समय  गवाहान  के सामने  सील  करके  या  उस  फूटेज  को  ही  न्यायालय में रिकर्ड पर लेकर , सामान को  उसके स्वामी को ( एफ आई आर  फाइल के दस दिन में ) सुपुर्द  कर  दिया जाए .

 जीन एडीटिंग
फसल   की जीन एडीटिंग चाहे वह  मनुष्य पर  हो , फसल पर  हो या जानवरों  पर   हो  स्पष्ट  नीति  के  अभाव  में काम  आगे  बढाना  एक जल्द्बाज़ी  में उठाया गया  कदम  होगा. ट्रांस्जेनिक फसलों को उगाने  में और  इनके प्रयोग इतर करने में  एक तो मूल प्रजाति के लुप्त होने   का  संकट  है ..आखिर  इस को यूं समझें कि एम टी  डीएन ए ( एक  कवच , खोपटा )  और डी एन ए ( गूदा , ग्लूकोआइन) है .
और इस तरह की फसल  की आयु  कम  होने के कारण इस ओर चिंता दर्षाई गई है .

                           कवि  आशुतोष  दुबे पुरानी  मिशाल यह भी है  कि  ब्याज़ घोडे से  भी  आगे चलती  है ? 
क्षेत्रपाल शर्मा
कवि की  कल्पना का बेजोड नमूना मुझे श्री  आशुतोष  दुबे  जी की  “ अश्वमेध “  कविता में  दिखा कि  इसका अंश ( प्रसाद  अर्थात कर्ज़ का हिस्सा)  सभी  नागरिक  लेंगे . वह  यज्ञ ( कर्ज़ ) जो अश्वमेध है  ,एसा  मुझे लगा .कर्ज़ की देनदारी  बहुत  बुरे  रूप में  होते देखी गई  है   , इससे हर कुटुंबी  को बचना चाहिए  और हरेक  सरकार  के कर्ता धर्ता भी एसे ही चलें  कि कर्ज़ कम हो .


यह रचना क्षेत्रपाल शर्मा जीद्वारा लिखी गयी हैआप एक कवि व अनुवादक के रूप में प्रसिद्ध है। आपकी रचनाएँ विभिन्न समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। आकाशवाणी कोलकातामद्रास तथा पुणे से भी आपके  आलेख प्रसारित हो चुके है .

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