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किसान
कृषि अब एक हानि का उद्यम हो गया है, (उद्यम तो अभी तक यह है नहीं, मैं कह रहा हूं) यही कारण है कि किसान और उनसे जुडे मज़दूर अब शहरों पर आश्रित हो गए हैं। श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने जय किसान का नारा दिया और आशा थी कि इनका भी जीवन सुधरेगा लेकिन कुछ खास न हो सका। चौधरी चरण सिंह कृषि के विकास के लिए समर्पित थे .शेतकरी और किसान यूनियन भी मोटे तौर पर राजनीतिक संगठन बनकर उभरे। ज्ञानी ज़ैल सिंह खेतों में हरियाली की बात करते थे लेकिन कोई पहल ज़ोरदार हुई नहीं कि योजनाओं में इस ओर सोचा जाता।

रासायनिक खेती से ऊजड हुए खेतों को पंजाब में अब परंपरागत खेती की आवश्यकता हो रही है।खेती विरासत मिशन के किसान जीवामृत एवं गाढ़े जीवामृत का इस्तेमाल करते हैं। जीवामृत देसी गाय के गोबर एवं मूत्र से बनाया जाता है। इसके इस्तेमाल से सूक्ष्म जीव तेजी से क्रियाशील हो जाते हैं। केंचुए जैसे अनेक अन्य जीव भी क्रियाशील हो जाते हैं। इनके बढ़ने से पक्षी एकत्र होने लगते हैं। कहते हैं, इसके डालने से धरती खुराकी तत्वों से भरपूर होने लगती है। '

अभी हाल में मुझे श्रीमती लीना मेंहंदले जी, जो गोआ राज्य की मुख्य सूचना आयुक्त हैं, के इस विषय पर विचार जानने का सुअवसर मिला।उन्होंने बताया कि किसान आज पशुओं की चोरी कैसे रोके, जोकि कसाई पशु वध करने के लिए चोरी कर रहे हें। इसका सीधा असर जैविक खाद की कमी फिर रासायनिक खाद का खेतों में बढता प्रयोग फिर उससे उतपन्न हुई मधुमेह आदि अन्य बीमारियों से ग्रसित होने से है .पशु धन की रक्षा और वृद्धि से हम एक कदम खुशहाली की ओर रख पाएंगे। अमेरिकी फार्मिंग रेंच हमारे देश के प्रतिकूल ही रहेंगे।
नीति आयोग देखना है किसानों के लिए क्या करेगा?

आनंद लोक 
एक व्यक्ति के प्रयास से अस्पतालों की शृंखला कलकत्ता शहर में हुई जो आज निर्धनों को सहज उपचार सुलभ करा रही है। यदि छोटे शहरों / कस्बों में इस तरह के प्रयास शुरू हो जाएं तो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा की सुलभ कराने की बात बन सकती है।

विलुप्त भाषाएं
क्षेत्रपाल शर्मा
डिजिटल पत्रिका "गुड" में केटी वुदेल ने बताया है कि नब्बे प्रतिशत भाषाएं अगले सौ साल में विलुप्त हो जाएंगी। मुद्रित प्रतियों का चलन अब कम हो ता जा रहा है। ग्रीक एक एसी भाषा है जिसके 26 अक्षरों में से 24 अक्षर विज्ञान के सूत्र आदि में संकेत रूप में प्रयुक्त होते हैं उनमें एक पाई (जिसका मान 22/7 है) भी है . जो भी हो, आज हिंदी कुंज, अनुभूति, साहित्य कुंज जैसी नेट पत्रिकाएं इस व्यस्त समय में आसान तरीके से साहित्य एवं ज्ञान, की अभिवृद्धि और मनोरंजन कर रहे हैं। कई संस्थान और विश्व विद्यालय अंग्रेजी में रूप कथा जरनल और अन्यान्य पत्रिकाएं नेट पर निकाल रहे हैं। जिससे साहित्य सर्वसुलभ हुआ है। इस दृष्टि से यह समाज को लाभांवित कर रहा है। वैसे भी पहले भी कई भविष्यवाणी निर्मूल सिद्ध हुई हैं



यह रचना क्षेत्रपाल शर्मा जीद्वारा लिखी गयी हैआप एक कवि व अनुवादक के रूप में प्रसिद्ध है। आपकी रचनाएँ विभिन्न समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। आकाशवाणी कोलकातामद्रास तथा पुणे से भी आपके  आलेख प्रसारित हो चुके है .

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  1. >> कृषि उत्पाद ही वास्तविक उत्पाद है यह कौशल से उत्पन्न किए जाते है अत: कृषि कर्म एक उद्यम है । वनोपज भी उत्पाद की श्रेणी में आते हैं चूँकि यह प्राकृतिक उत्पाद है अत: इसे उद्यम से प्राप्त उत्पाद नहीं कहा जा सकता.....

    अन्य उत्पाद चूँकि संचित सम्पदा का सन्दोहन मात्र हैं अत: ऐसे सन्दोहन वास्तविक उत्पाद की श्रेणी में नहीं आते.....

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