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शुभ लाभ
हमारे  चिंतन में शुभ  पहले है . लाभ वह हो  जो शुभ हो ,इस  भावना के साथ  किए  गए  काम   पूरे होते  हैं . व्यक्ति  भी समाज  के लिए मंगलकारी होता है  और समष्टि  भी .
शरिआक वियेंगए
यह  शब्द तमिल  का है  और अंगिका ( बिहार  में  कुछ जगह  बोला भी जाता है)  भाषा  में यह  जस का तस  है . इसका अर्थ “ संभाल  कर  रखिए “ है . यह प्रसंग  इस कारण  है  कि  अंग्रेजी के भारतीयलेखक इंजीनियर
चेतन भगत ने हाल  में  लिखा है  कि वे   हिंदी से प्यार करते  हैं लेकिन वे चाहते  हैं  कि लिपि हिंदी  के  लिए  रोमन  हो . इस पर  विचार  करने की जरूरत  है यह भाषा के लिए  शुभ सोच  नहीं हैं .
संसार की तीन लिपियों ( अरेबिक, चाइनीज एवं रोमन ) की तुलना में देवनागरी श्रेष्ठ है . इस श्रेष्ठता का कारण इसके वैज्ञानिक होने में हैं इसके स्वरोच्चार सीधे हमारे शरीर रचना से जुडे हैं . लिपि एक चित्र है , लेकिन  हमारी भारतीय भाषाओं की संरक्षा के लिए देवनागरी लिपि आवश्यकहै.चाहे वह मोबाइल हो या कंप्यूटर हो, हम अपने तरीके से देसी लिपि ( इन स्क्रिप्ट ) टाइप करना अपनाएं यह परम जरूरीहै.लिपि( चित्र हमारी भाषाओं के अलग अलग हैं (जैसे पंजाबी, बंगाली ...) लेकिन वर्णानुक्रम एक है . तमिल  में भी अकेला वर्ण ध्वनि के हिसाबसे संश्लिष्ट है चार  वर्णों का अकेला प प्रतिनिधित्व करता है  पर पढनेवाले को  यह  समझ आता है  कि यह बापू है  या बाबू .
 यह ठीक  है कि  सुविधा के लिए  अब धोतीकुर्ता पहनने का प्रचलन कम हुआ है . लेकिनइस तर्ज़ पर संस्कार
क्षेत्रपाल शर्मा
और संस्कृति की संवाहक  भाषा की लिपि  की संरक्षा इस के प्रयोग से ही होगी ,वह  हम करें .
नासा के इंजीनियर ब्रिग रिक्स ने जब कहा कि संस्कृत भाषा कंप्यूटर भाषा के लिए  ठीक है तो कंप्यूटर की भाषा का पैटर्न  नेचुरल भाषओं (  संस्कृत , लेटिन  आदि )  के पैटर्न (भाषा के व्याकरण के  पैटर्न से आशय है ) से मेलजोल से है.
प्रयोग शालाएं
विज्ञान के विद्यार्थियों  के  लिए माध्यमिक और उच्च्तर माध्यमिक स्तर पर प्रयोगशालाओं में उपकरण  और  केमिकल नहीं  मिलते , यह राष्ट्रीय  सोच  का विषय  है .  इस पर उच्च अधिकारी तत्काल ध्यानदें  यह साइंटिफिक टेम्परामेंट  जगना चाहिए.


यह रचना क्षेत्रपाल शर्मा जीद्वारा लिखी गयी है। आप वर्त्तमान में राष्ट्रीय बाल भवन में हिंदी विशेषज्ञ का काम कर रहें हैं । आप एक कवि व अनुवादक के रूप में प्रसिद्ध है। आपकी रचनाएँ विभिन्न समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। आकाशवाणी कोलकातामद्रास तथा पुणे से भी आपके  आलेख प्रसारित हो चुके है .

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  1. खेत्रपाल जी, लेख काफी विचारोत्तेजक है. एक बात को समझना चाहूँगा कि जैसै तमिल में बाबू और बापू में फर्क जाना जा सकता है, वैसे ही कमला व गमला में फर्क जाना जा सकता है क्या ? मेरी जानकारी में तामिल शब्दों के प्रथम वर्ण किसी भी वर्ग के तृतीय वर्ग नहीं हो सकते. तृतीय वर्ण शब्दों के बीच ही रह जाते हैं. दूसरा दीर्घ व्यंजन ( ख , घ जैसे) तामिल में नहीं होते इसलिए - " प पूरे चार वर्णों का प्रतिनिधित्व करता है" पर विचार करना जरूरी है. वे शायद 'प' व 'ब' दो ही वर्णों का प्रतिनिधित्व करते हैं. कृपया विचारें व अपनी राय व्यक्त करें.

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  2. क्षेत्रपाल शर्मा जी का लेख सराहणीय है तो विचारणीय भी है । तमिल भाषा की विशेषता ही उसका एक अक्षर के विभिन्न उच्चारण - जसे विभिन्न उच्चारणों के लिए हिंदी व अन्य भाषाओं में भिन्न भिन्न अक्षर हैं । सरियाग वौयुग का अर्थ ठीक से रखना । बापू या पापू में या कमला या गमला के अर्थ भिन्न है । इसलिए तमिल भाषी हिंदी सीखते समय इन चार उच्चारणों में अंतर पकड नहीं पाते हैं । यूं कहा जा सकता है कि अंतर समझते नहीं ।

    रेवती रमेश

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    1. रेवती जी,
      आपने कहा - कमला व गमला के अर्थ भिन्न हैं. क्या मैं यह मान लूँ कि तमिल में कमला व गमला उसी उच्चारण के साथ लिखे जा सकते हैं ? वैसे ही बाप और पाप. मेरी पहली टिप्पणी में कोई सुधार संभव है तो कृपा कर बताएं. आप चाहें तो विस्तृत जानकारी निम्न ईमेल पर भी दे सकती हैं.
      laxmirangam@gmail.com

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