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डॉ. जोराम यालाम नाबाम को प्रथम साहित्य मंथन सृजन पुरस्कार प्रदत्त
हैदराबाद, 18 नवंबर 2014 (प्रेस विज्ञप्ति)।
मेरी माँ कहती थी कि चमत्कार पर विश्वास मत करो बल्कि चमत्कार को देखना सीखोआज मेरी माँ मुझे याद आ रही है क्योंकि हैदराबाद के इस सभागार में मेरे लिए चमत्कार हो रहा हैमुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि प्रेम के इस शहर में मुझे इतने महत्वपूर्ण पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा हैमेरे पास शब्द नहीं है कि इस खुशी को अभिव्यक्त कर सकूँबस महसूस कर रही हूँमुझे लग रहा है कि 'साहित्य मंथन' ने मुझ पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी डाल दी है कि मैं लगातार अधिक से अधिक लिखती रहूँ'
ये उद्गार अरुणाचल प्रदेश की पहली हिंदी कथाकार डॉ.जोराम यालाम नाबाम ने 'साहित्य मंथन' के तत्वावधान में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के खैरताबाद स्थित सम्मेलन कक्ष में संपन्न सम्मान समारोह में प्रथम 'साहित्य मंथन सृजन पुरस्कार' ग्रहण करते हुए प्रकट किएयह पुरस्कार उन्हें वर्ष 2013 में प्रकाशित उनकी कथाकृति 'साक्षी है पीपल' पर प्रदान किया गया

समारोह में उपस्थित सभी साहित्यप्रेमी उस समय अभिभूत हो उठे जब डॉयालाम ने अपने वक्तव्य का समापन करते हुए कहा कि 'मैं अपने हृदय की पूरी श्रद्धा के साथ यह पुरस्कार शिरोधार्य करते हुए पूर्ण पवित्रता का अनुभव कर रही हूँ।' आज जब साहित्यिक पुरस्कारों को लेकर पुरस्कारदाता संस्था और पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं के मन में केवल लेन- देन की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है वहाँ जोराम यालाम नाबाम द्वारा पुरस्कार की स्वीकृति का यह भाव एक नई आश्वस्ति को जन्म देता है
उल्लेखनीय है कि 'साहित्य मंथन सृजन पुरस्कार' का प्रवर्तन पंचतुर्देव शास्त्री की स्मृति में इसी वर्ष किया गया हैसंस्था की अध्यक्ष डॉपूर्णिमा शर्मा ने बताया कि यह पुरस्कार प्रति वर्ष साहित्य, समाजविज्ञान और संस्कृति संबंधी प्रकाशित कृति पर एक-एक वर्ष के क्रम में प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के अंतर्गत 11,000 रुपए की सम्मान राशि, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, शाल, श्रीफल और लेखन सामग्री सम्मिलित हैं

डॉयालाम को पुरस्कार प्रदान करते हुए 'नानीलु' के प्रवर्तक और साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत प्रतिष्ठित तेलुगु कवि प्रोएनगोपि ने कहा कि यह मात्र डॉयालाम का ही सम्मान नहीं बल्कि पूर्वोत्तर की हिंदी रचनाशीलता का सम्मान हैउन्होंने ध्यान दिलाया कि हिंदी ही भारत को अखंड बनाने वाली भाषा हैयालाम की कहानियों में मुखरित स्त्री वेदना को उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के जनजातीय परिवेश का सच बताया
विश्वप्रसिद्ध कला संग्राहक पद्मश्री जगदीश मित्तल ने दीप प्रज्वलन करके कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन करते हुए कहा कि डॉयालाम को सम्मानित कर 'साहित्य मंथन' ने एक अनूठी पहल की हैयह सिलसिला बना रहना चाहिए

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पधारे प्रोदेवराज ने अपने वक्तव्य में अरुणाचल सहित समस्त पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत और पौराणिक कथाओं का उल्लेख करते हुए आह्वान किया कि उस समस्त अलिखित संपदा को हिंदी के माध्यम से देश और दुनिया के सामने लाया जाना चाहिएइस दिशा में पुरस्कृत लेखिका के प्रयासों की उन्होंने मुक्त कंठ से सराहना की
समारोह की अध्यक्षता करते हुए अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोएमवेकटेश्वर ने कहा कि अरुणाचल में जीवन को रोज एक नई चुनौती का सामना करना पड़ता हैऐसे में वहाँ की स्त्रियाँ अपने अदम्य साहस के बल पर विषम परिस्थितियों से दो-दो हाथ करती हैं तथा डॉ। यालाम के कहानी सग्रह 'साक्षी है पीपल' में अरुणाचल की जनजातियों की इसी स्त्री का दर्द अभिव्यक्त हुआ है
इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के पौराणिक आख्यानों पर आधारित डॉजोराम यालाम नाबाम की हिंदी पुस्तक 'तानी मोमेन' (पुरखों की लीलास्थली) के विवेक नाबाम द्वारा किए गए अंग्रेजी अनुवाद को भी डॉएमवेंकटेश्वर ने लोकार्पित किया
समारोह का संचालन डॉजीनीरजा ने किया तथा 'साहित्य मंथन' के संस्थापक डॉऋषभदेव शर्मा ने आभार प्रकट किया

चित्र परिचय:
  •     'साहित्य मंथन सृजन पुरस्कार' ग्रहण करते हुए अरुणाचल प्रदेश की हिंदी लेखिका डॉजोराम यालाम नाबामसाथ में - प्रोएनगोपि, पद्मश्री जगदीश मित्तल, प्रोएमवेंकटेश्वर और विवेक नाबाम
  •      डॉजोराम यालाम नाबाम की पुस्तक के अंग्रेजी अनुवाद 'तानी मोमेन' का लोकार्पण करते हुए प्रोएमवेंकटेश्वरसाथ में - प्रोदेवराज, प्रोएनगोपि, पद्मश्री जगदीश मित्तल, अनुवादक विवेक नाबाम, लेखिका डॉजोराम यालाम नाबाम, डॉगुर्रमकोंडा नीरजा और प्रोऋषभदेव शर्मा

प्रस्तुति: डॉगुर्रमकोंडा नीरजा
सह-संपादक 'स्रवंति'
प्राध्यापक
उच्च शिक्षा और शोध संस्थान
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा
खैरताबाद, हैदराबाद - 500 004
मोबाइल - 09849986346
ईमेल - neerajagkonda@gmail.com

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