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राजभाषा हिंदी के प्रचार प्रसार में कम्प्यूटर का योगदान

राजभाषा (हिंदी) समाहित कम्प्यूटर, लोगों के स्वाभिमान को सवाँरने में काफी सहयोगी हुआ है. अपनी भाषा में काम करना एक अलग ही खुशी देता है.

राजभाषा वाले संगणक से हिंदी जानने वाले बहुत लोंगों  को उनके बहुत से सवालों का जवाब मिल गया. उनके लिए हिंदी में कंप्यूटर पर काम करना बहुत ही आसान हो गया. साथ ही बहुतों के बहुत सारे बहाने छूट गए. फिर शुरु करना पड़ेगा या टाईप करना सीखना पड़ेगा – सब धरे रह गए. हिंदी प्रेरको का नारा - आप शुरु तो कीजिए, सीख जाएंगे – सामने आ गया. सही नारा है, यदि आप हिंदी लिख पढ़ लेते हैं और कोशिश करने से परहेज नहीं करते, तो हिंदी टाईपिंग के लिए हाथ साफ करने में आपको एक सप्ताह और ज्यादा से ज्यादा एक पखवाड़ा लगेगा. अब रफ्तार की बात करेंगे, तो निर्भर करेगा कि आप कितना अनुभव प्राप्त कर पाते हैं. राजभाषा विभागों ने कई जरूरी वाक्याँशों व टिप्पणियों को संगणक में सँजो रखा है. कॉपी-पेस्ट समेत समस्त संगणक (कम्प्यूटर) तकनीक राजभाषा के साथ है.

राजभाषा के पैकेज आकृति, अक्षर, लीप कुछ ज्यादा चले. आप जिस भारतीय भाषा को लिख – पढ़ - बोल लेते हो, लीप-ऑफिस पेकेज में उसी में टाईप करो और फिर चुनकर किसी भारतीय भाषा में बदल लो. इस ध्वनि-आधारित पैकेज में भाषा बदलने पर उच्चारण नहीं, केवल लिपि बदलती है. जहाँ कुछ भी नहीं हो पा रहा था, वहाँ यह बहुत बड़ी सुविधा है ? एक ही पन्ने पर आप कई भाषाएँ लिख सकते हैं. लीप ऑफिस सबसे शक्तिशाली हिंदी पैकेज है. नीचे एक उदाहरण देखिए.

অনূপ কুমার বোললো - मैं picture  में  देखा –  నాకు తేలుగు రాదు -  ਅਸਿ ਭਾਂਗਡਾ ਪਾ ਨਹੀੰ ਸਕਤੇ ਸੀਗੇ.

इस ऊपरी वाक्य में बंगला, हिंदी, अंग्रेजी, तेलुगु एवं पंजाबी भाषाएं लिखी गई हैं.

संगणक में राजभाषा लिखने के बहुत तरीके हैं. हिंदी की-बोर्ड से कतराने वाले फोनेटिक ट्रान्सलिटेरेशन अपनाएं. टाईप अंग्रेजी में और पटल पर देवनागरी लिपि - यह बहुत सुविधाजनक व सरल है. Ekalam.raftaar.in से आप आसानी से ट्राँसलिटेरेशन (लिप्यंतरण) की जानकारी पा सकते हैं.  IME Indic पैकेज में तो ड्रॉपड्राऊन मीनू झलक जाते हैं. आपको चयन भर करना है कि आपको कौन सा अक्षर या शब्द समुच्चय चाहिए. विस्तृत जानकारी के लिए नीचे के लिंक पर क्लिक करें.


यदि लिंक पढ़े नहीं जा रहे हों तो इस लिंक पर बहुत सारे लिंकमिल जाएँगे.


राजभाषा विकास परिषद के ब्लॉग पर भी इसकी सूचना है. पर लिंक यहाँ लगाने के लिए जो संदेश भेजा था, उसका अभी तक कोई जवाब नहीं मिला इसलिए नहीं लगा पा रहा हूँ.

समय समय पर हिंदी के पेकेज बदलते रहने की वजह से कुछ परेशानियाँ हुई. लेकिन साथ ही साथ कुछ ही समय में परेशानी को दूर करने के तरीके भी सामने आ गए. जरूरत ने नए - नए आविष्कारों को जन्म दिया. सबसे बड़ी परेशानी रही - पुराने फॉँट नए पेकेज में या तो चलते ही नहीं थे या फिर गलत - सलत पढ़े जाते थे. आज भी ऐसे पेकेज हैं जिसमें लिखने पर अक्षरों के पहले लगने वाली मात्राएं अक्षरों के बाद दिखती और छपती हैं. कुछ फाँट तो नए पेकेज में पढ़े ही नहीं जाते और वहाँ कुछ अजीब से चिन्ह (आस्की) नजराते हैं.

हाल ही में ekalam.Raftaar.in में फाँट बदलने की सुविधा आ गई है. इससे सारे पुराने फाँट की रचनाएं या रिकार्ड नए फाँट में बदले जा सकते हैं. इसमें कुछ सीमा तक सेवा निशुलक है - प्रतिदिन करीब हजार शब्दों का फाँट मुफ्त में बदला जा सकता है. उसके बाद खर्च करने से प्रतिदिन 5000 या उससे अधिक शब्दों के फाँट बदलने का भी प्रावधान है. ऐसी बहुत सी आवश्यक सुविधाओं ने हिंदी में काम करने को अत्यंत आसान बना दिया है. गूगल पर ऐसे और पोर्टल खोजे जा सकते हैं

एम एस ऑफिस के नए पैकेजों में हिंदी कंप्यूटरों के साथ आ रही है. कम्प्यूटर पर हिंदी (राजभाषा) के लिए यूनिकोड की मात्र एक ही लिपि मंगल पर सरकार की मोहर है. अभी यूनिकोड में हिंदी के बहुत कम फाँट हैं. हिंदी वालों को इस पर ध्यान देते हुए कुछ और फाँट विकसित करवाने चाहिए. कंप्यूटर के – इनस्किप्ट - की बोर्ड पर हिंदी आसानी से टाईप किया जा सकता है. वैसे पुराने टाईपराईटरों के की बोर्ड भी कहीं कहीं प्रयोग में लाए जाते हैं. जो लोग टाईपराईटर पर काम करते थे उनके लिए यह सुविधाजनक है. इनस्क्रिप्ट में की स्ट्रोक्स कम लगते हैं, भाषा बदलने के लिए केवल चुनाव कर लीजिए - लिपि बदलती रहेगी – स्ट्रोक्स वही रहेंगे, तो उच्चारण भी वही रहेगा. बहुत अच्छी स्पीड से काम होता है. एक ही मंगल फॉंट में टाईप किया जाए तो अलग-अलग कार्यालयों में एडिटिंग की जा सकेगी, फिर टाईप नहीं करना पड़ेगा.

लीप ऑफिस जैसे पेकेज से एक और फायदा यह हुआ कि भारत की एक भाषा में आने वाले शब्दों के उच्चारण को लिखने के लिए दूसरी भाषा में भी नए वर्ण आ गए. जैसे दक्षिण भारतीय भाषाओं में ए व ऐ ( तथा  और औ ) के बीच की ध्वनियों के लिए हिंदी में विकल्प आ गए हैं किंतु अब तक उन्हें वर्णमाला में जगह नहीं मिली है.

करीब सभी सामाजिक पोर्टलों पर सुविधा के कारण राजभाषा में बहुत कुछ हो रहा है और भी होगा. हिंदी के पोर्टल, ई-पत्रिकाएं, किताब और ब्लॉग्स खुले हैं. जो कुछ कभी अंग्रेजी में ही होता था, अब हिंदी में भी (साथ ही सभी भारतीय भाषाओं में) हो सकता है और हो भी रहा है. इन सबके बावजूद भी आज हिंदी में स्पेल-चेक व सॉर्टिंग की सुविधा नहीं है. इसकी कमी को पूरा करने के लिए शायद कुछ और वक्त लगेगा.

रंगराज अयंगर
संगणकों में राजभाषा की सुविधा से बार बार की टाईपिंग बंद हो गई. केवल परिवर्तन मात्र फिर करने पड़ते हैं. संप्रेषण (मास कम्यूनिकेशंस) की बहुत बड़ी सुविधा उपलब्ध हो गई है, जिससे कम समय में काम और निर्णय हो पाते हैं. लोग एक ही मिसिल पर बिना कागजात भेजे काम कर पाते हैं. कागज की बचत होती है और पर्यावरण सुधरता है. पुराने सुरक्षित रिकार्ड तुरंत उपलब्ध हो जाते हैं और बार-बार प्रिंट किया जा सकता है. यहाँ तक कि इन संप्रेषण सुविधाओं के कारण मैं एक शहर में बैठकर लिखा चिट्ठा अपने महकमे के किसी दूसरे शहर के कंप्यूटर विशिष्ट पर छाप सकता हूं ताकि उस व्यक्ति को यह तुरंत प्राप्त हो जाए.

हो सकता है कुछ समय बाद यह सुविधा इंटरनेट पर भी आ जाए कि ईमेल भेजने की तरह आप कोई पत्र मुझे बताकर मेरे प्रिंटर पर सीधा भेज दें जिसे हस्ताक्षर कर मैं उचित जगह जमा कर सकूँ. कम समय  में ही ऐसी सुविधाएं मिलने लगेंगी. अब हिंदी में काम करने वाले भी ऐसी सुविधाओं का फायदा ले सकेंगे.

जैसे अतर्राष्ट्रीय संगठनों में ऐसे अनुवादक मशीने लगाई जाती हैं जिसमें बोलने वाला अपनी भाषा में बोलता है और सुनने वाला उसे अपनी भाषा में सुनता है. इसी तरह ऐसी कंप्यूटर की भी भविष्य में कल्पना की जा सकती है कि मैं यहाँ से हिंदी मे लिख कर एक पत्र प्रेषित करूं और उसे चाईना में मंडारिन भाषा में देखा या छापा जा सके. मैं एक हिंदी पत्र का प्रिंट अपने कार्यालय से देता हूँ जो पोलेंड के किसी कार्यालय में उनकी भाषा में छापा जा सकेगा. इस तरह की सुविधाएं सारे विश्व को संपन्न करेंगी

सर्वोत्तम उपलब्धि है कि आज अंग्रेजी नहीं जानने वाले भी मुख्य धारा में समाहित होकर अपना सहयोग दे पा रहे हैं. सारा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम राजभाषा के लिए भी उपलब्ध है.  सारे रास्ते खुल गए हैं. सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं. कईयों ने अपनाया भी है. इसके कारण लोग कम्प्यूटर चलाना सीख रहे हैं.

इन सुविधाओं का लाभ उठाकर यदि अपने देश की भाषाओं और विदेशी भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान को हिंदी में उपलब्ध कराने का कोई ठोस प्रयास सरकार करे या करने वालों को सहारा दे, तो हिंदी की प्रगति कई गुना बढ़ जाएगी और हिंदी राष्ट्रभाषा ही नहीं विश्व भाषा बनने के ख्वाब भी बखूबी देख सकेगी . लेकिन इसके लिए बहुमुखी व बहु-आयामी प्रयास और सहयता की बहुत जरूरत होगी.

अब हम पर निर्भर है कि इसका कितना सदुपयोग करते हैं.

यह रचना माड़भूषि रंगराज अयंगर जी द्वारा लिखी गयी है . आप इंडियन ऑइल कार्पोरेशन में कार्यरत है . आप स्वतंत्र रूप से लेखन कार्य में रत है . आप की विभिन्न रचनाओं का प्रकाशन पत्र -पत्रिकाओं में होता रहता है . संपर्क सूत्र - एम.आर.अयंगर. , इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड,जमनीपाली, कोरबा. मों. 08462021340


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  1. शुक्रिया इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिये।

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    1. Dear Ankur,

      I have missed your comment and kust by chance I have sen it today.

      Thanks for your nice commnt and I beg a pardon for such a delayed response.

      Iyengar.

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