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कवि सुधेश की गज़लें 
(1)
दुनिया को देखता हूँ बड़ी हसरतों के साथ
सुधेश

महरूमियों की दास्ताँ हूँ मुसर्रतों के साथ.
कब की गुज़ार दी है अपनी ज़िन्दगी
फिर भी तो ज़िन्दा हूँ कई ज़रूरतों के साथ.
हसरत निकल गई है मुझ को रुला रुला
फिर भी दिल धड़कता कई हसरतों के साथ.
निर्मम है ज़माना तो नहीं कुछ हुआ करे
रिश्ता न तोड़ पाया मगर मुहब्बतों के साथ.
सब से ही चाहतों की तमन्ना हुए लिये
फिर क्यों निबाह करता रहा नफ़रतों के साथ.
(2)
कह दो कह दो अपना ग़म
कहने से होगा कुछ कम.

दुनिया कितनी निर्मम है
कह देती दो आँखें नम.
जितना दुख उतना मधु स्वर
श्रोता ख़ुश ज़्यादा या कम.
माना ख़ुश पर कहते क्यों
जल कर कुछ होंगे बेदम.
जितना रोना उतना रो
हँस लेना लेकिन कम कम.
जीते जी गाली देते
मरने पर करते मातम.
जीवन काली रजनी है
पखवाड़े में इक पूनम.
ख़ुश हो लें पर सब के सँग
ग़म आये चुप सह लें ग़म.
(3)
मेरे शुभचिन्तक मुझे भरमा रहे हैं
मगर दुश्मन देखिये कतरा रहे हैं.
बड़प्पन तो टिका बैसाखियों पर
मगर उन पर टिके इतरा रहे हैं.
एक कर डाला ज़मीनो आसमां को
मगर इनआम लेते हुए शरमा रहे हैं.
इमरजैन्सी में बजाई चैन की वंशी
वक़्त बदला अब वही घबरा रहे है.
चुनिन्दा गालियाँ जो बक रहे थे
दुश्मनों को सभ्यता सिखला रहे हैं.
देश का ठेका लिया था पीढ़ियों तक
ठेकेदारी ख़त्म तो हकला रहे हैं.
(4)
खाना पीना है कुछ पल भर
उस के ख़ातिर खटना दिन भर.
भूले भटके हँस लेता हूँ
लेकिन रोना है जीवन भर.
जैसे कल की सारी बातें
इत्ते क़िस्से सुन कारीगर.
आख़र पढ़ते आँखें फूटीं
जो अनपढ़ हैं दीदावर.
लिखते मेरी क़लमें टूटीं
पर वे लेखक हैं पेशेवर.
धावक को बस धकिया कर के
लँगड़े बैठे हैं चोटी पर.
मैं कुछ आख़र लिख लेता हूँ
कवि पर वे ऊँचे आसन पर.

- सुधेश



यह रचना डॉ.सुधेश जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी, फिर सुबह होगी ही, घटनाहीनता के विरुद्ध, तेज़ धूप, जिये गये शब्द, गीतायन, बरगद (खण्डकाव्य), निर्वासन (खण्ड काव्य), जलती शाम, हादसों के समुन्दर (ग़ज़लसंग़ह) आदि प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ हैं. आपको, मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का भारतीय कविता पुरस्कार 2006, भारत सरकार के सूचना प़सारण मंत्रालय का भारतेन्दु हरिश्चन्द़ पुरस्कार 2000, लखनऊ के राष्ट़़धर्म प़काशन का राष्ट़़धर्म गौरव सम्मान 2004, आगरा की नागरी प़चारिणी सभा द्वारा सार्वजनिक अभिनन्दन 2004 आदि से सम्मानित किया गया है.
संपर्क सूत्र - सुधेश, 314 सरल अपार्टमैन्ट्स, द्वारिका, सैक्टर 10 दिल्ली 110075

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