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वो ही चला मिटाने नामो-निशाँ हमारा
देवी नागरानी
जो आज तक रहा था जाने-जहाँ हमारा
दुश्मन से जा मिला है अब बागबाँ हमारा
सैयाद बन गया है लो राज़दाँ हमारा
ज़ालिम के ज़ुल्म का भी किससे गिला करें हम
कोई तो आ के सुनता दर्द--निहां हमारा

हर बार क्यों नज़र है बर्क़े-तपाँ की हम पर
हर बार ही निशाना क्यों आशियाँ हमारा

दुश्मन का भी भरोसा हमने कभी न तोड़ा
बस उस यकीं पे चलता है कारवाँ हमारा

बहरों की बस्तियों में हम चीख़ कर करें क्या
चिल्लाना-चीख़ना सब है रायगाँ हमारा
परकैंच वो परिंदे हसरत से कह रहे हैं
'देवी' नहीं रहा अब ये आसमां हमारा


यह  ग़ज़ल देवी नागरानी जी द्वारा लिखी गयी है . आपकी 'चरागे दिल ,उड़ जा पंछी,दिल से दिल तक ,लौ दर्दे दिल की तथा गम में भीगी खुशी" आदि कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी है . देवी नागरानी , हिन्दी ,सिन्धी तथा अंग्रेजी में समान रूप से साहित्यिक रचना करती हैं .संपर्क सूत्र - 9-डी कॉर्नर व्यू सोसाइटी, 15/33 रोड, बांद्रा, मुंबई 400050 फ़ोन: 9987938358

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  1. तुम मुझे अपनी ईमेल आईडी दे सकते हैं. मैं आपसे बात करना चाहता हूं, आप नए jercy में हैं,
    मैं हिंदी में लिखने के लिए चाहते हैं, मैं एक लड़का हूँ। आप ऐसा करने में मेरी मदद कर सकते हैं..

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