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इल्जाम किसका था इल्जाम हम पर दे गए ,
राहुलदेव गौतम
जब यही हाल था हमसे बात करते ,
कुछ कहे भी नहीं इतना दूर चले गए .

हम उनसे क्या आरज़ू करें,
जब वे पर्दा में थे ,वे बेपर्दा हो गए .

लो कुछ इस तरह बिता लेते है ज़िन्दगी ,
बात उन्होंने कुछ ऐसी कही लेकिन वे मरने चले गए .

ये दुनिया भी हमीं को दगाबाज़ कहती है ,
कहने को प्रेम था ,वह फरेब था जिसमे उलझते चले गए .

वक्त निकल जाता ये पता नहीं चलता ,
वे इंसान थे या कुछ और कितने चेहरे बदलते चले गए .


यह रचना राहुलदेव गौतम जी द्वारा लिखी गयी है .आपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है . आपकी "जलती हुई धूप" नामक काव्य -संग्रह प्रकाशित हो चुका  है .
संपर्क सूत्र - राहुल देव गौतम ,पोस्ट - भीमापर,जिला - गाज़ीपुर,उत्तर प्रदेश, पिन- २३३३०७
मोबाइल - ०८७९५०१०६५४

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