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नया कुरुक्षेत्र / मधुरिमा प्रसाद की कविता
नया कुरुक्षेत्र / मधुरिमा प्रसाद की कविता

कोई चाहा , न चाहा मधुरिमा प्रसाद  जन्म तुम्हारा तो हुआ किसी घर से निकली ढोलक की थाप कहीं से निकली मर्मान्तक पीड़ा की आह . घर का ...

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हिंदीकुंज प्रश्नावली (६)
हिंदीकुंज प्रश्नावली (६)

प्रिय मित्रों , हिंदीकुंज प्रश्नावली के अंतर्गत आज प्रस्तुत है - प्रश्नावली की छठी कड़ी . इसके माध्यम से अपने हिंदी भाषा व साहित्य के ज्ञान...

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विशाल पंखों वाला बहुत बूढ़ा आदमी / गेब्रियल गार्सिया मार्केज़
विशाल पंखों वाला बहुत बूढ़ा आदमी / गेब्रियल गार्सिया मार्केज़

गेब्रियल गार्सिया मार्केज़ बारिश के तीसरे दिन उन्होंने घर के भीतर इतने केकड़े मार दिए थे कि पेलायो को अपना भीगा आँगन पार करके उन्हें सम...

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हिंदी उच्चारण में सहयोग कीजिए
हिंदी उच्चारण में सहयोग कीजिए

हर अभिभावक चाहेगा और उसे चाहना भी चाहिए कि उसके दिल का टुकड़ा आसमान की ऊंचाइयों को छुए. यदि उस मुकाम के लिए उसे हिंदी सीखनी या सिखानी ...

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डेमोक्रेसिया / असग़र वजाहत
डेमोक्रेसिया / असग़र वजाहत

असग़र वजाहत ‘डेमोक्रेसिया’ को प्रतिष्ठित कथाकार असग़र वजाहत की विशिष्ट कहानियों का संग्रह कहा गया है। इस संकलन की रचनाएँ विशिष्ट ज़रूर ...

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