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माँ भारती तुम्हें
करता हूँ सब समर्पण .
मेरा जो कुछ भी है माँ ,
करता हूँ सब मै अर्पण
माँ भारती तुम्हे
करता हूँ सब समर्पण .

माँ तेरी ही दया से
जो कुछ है सब मिला है ,
तेरा तुझको सौपता हूँ,
चाहता हूँ तेरा दर्शन ,
माँ भारती तुम्हे
करता हूँ सब समर्पण .

माँ कृपा कर तू हम पर
बन सब का तू सहारा
अर्जी है यही हमारी
कोई भी ना हो बंधन
माँ भारती तुम्हे
करता हूँ सब समर्पण .

हर ले माँ दुःख तू सारा
अरविन्द कुमार सिंह
करते है आर्त्त सब जन
तेरी दया से माता
सुख शान्ति का हो वर्षण
माँ भारती तुम्हे
करता हूँ सब समर्पण .

जो भी शरण में आये
उसे तू गले लगा ले
जिस ठौर हो अँधेरा
भर रौशनी से दामन
माँ भारती तुम्हे
करता हूँ सब समर्पण .



" यह रचना अरविन्द कुमार सिंह द्वारा लिखी गयी है . आप कोलकाता में अध्यापक के रूप में कार्यरत है . .प्रस्तुत कविता 'नवरंग भाग -२' काव्य संग्रह से लीगयी है . आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है . व्यंग के माध्यम से वर्तमान हालतपर रोष व्यक्त करना तथा आशावादिता बनाये रखना इनकी रचनाओं का प्रमुख लक्षण हैं ."

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  1. bahut hee saral sabdo mye maa bharti kee vandana kee hai. sundar prastuti.

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  2. सिर्फ तुकबंदी के सिवाय कुछ नहीं है , कविता गद्यवत हो गयी है . इस पर ध्यान दें .

    उत्तर देंहटाएं

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