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श्रीकांत वर्मा
केवल अशोक लौट रहा है
और सब
कलिंग का पता पूछ रहे हैं

केवल अशोक सिर झुकाए हुए है
और सब
विजेता की तरह चल रहे हैं

केवल अशोक के कानों में चीख
                       गूँज रही है
और सब
हँसते-हँसते दोहरे हो रहे हैं

केवल अशोक ने शस्त्र रख दिए हैं
केवल अशोक
              लड़ रहा था।

श्रीकांत वर्मा ( १९३१- १९८६) का जन्म बिलासपुर , मध्य प्रदेश में हुआ। वे गीतकार, कथाकार तथा समीक्षक के रूप में जाने जाते हैं। ये राजनीति से भी जुडे थे तथा लोकसभा के सदस्य रहे। भटका मेघ , मायादर्पण , दिनारम्भ , जलसाघर , मगध इनकी काव्य-कृतियाँ हैं। 'झाडियाँ तथा 'संवाद इनके कहानी-संग्रह है। 'बीसवीं शताब्दी के अंधेरे में एक आलोचनात्मक ग्रंथ है।

सौजन्य - हिंदी विकिपीडिया

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  1. He was still violent after Calinga War. More Jains were killed by his order.

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  2. Tora or bistar se btaiye rachna kaal ka vibaran mahatbpur rahega

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