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अमीर  खुसरो 
जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर
ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर।

जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया
हक्का इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर।

तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है
तुझ दोस्ती बिसियार है एक शब मिली तुम आय कर।

जाना तलब तेरी करूँ दीगर तलब किसकी करूँ
तेरी जो चिंता दिल धरूँ, एक दिन मिलो तुम आय कर।

मेरी जो मन तुम ने लिया, तुम उठा गम को दिया
तुमने मुझे ऐसा किया, जैसा पतंगा आग पर।

खुसरो कहै बातों ग़ज़ब, दिल में न लावे कुछ अजब
कुदरत खुदा की है अजब, जब जिव दिया गुल लाय कर।



अमीर खुसरो को हिंदी का पहला लोकप्रिय कवि माना जाता है । खुसरो अरबी ,फारसी ,तुर्की और हिंदी के विद्वान थे तथा इन्हें संस्कृत का भी थोडा बहुत ज्ञान था । इन्होने कविता की ९९ पुस्तकें लिखी जिनमे कई लाख शेर थे । पर अब इनके केवल २० -२२ ग्रन्थ ही प्राप्य है। इन्होने  फारसी से अधिक हिंदी में लिखा है । इनके साहित्य में भी समय समय पर प्रक्षेपों का समावेश होता रहा है। इनकी कुछ पहेलियाँ ,मुकरियां और फुटकर गीत उपलब्ध होते है ,जिनसे इनकी विनोदी प्रकृति का भली भातिं परिचय मिल जाता है । मनोरंजन के खजाने  से मालामाल सूफियों में अग्रणी कवि अमीर खुसरों ने अपनी सहज मनोवृति के कारण जन सामान्य को उन्मुक्त ह्रदय से मालामाल कर दिया ।

विडियो के रूप में देखें :-

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  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 31/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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