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अकबर बीरबल
एक बार स्वप्न में बीरबल ने देखा कि हज़ार मुँह वाली दुर्गा देवी की मूर्ति महाविक्राल वेश धारण किये सामने खड़ी है . उसका वेश बड़ा ही भयोत्पादक था . उसे देखकर पहले तो बीरबल बड़े प्रसन्न हुए फिर वे उदास हो गए. दुर्गा माता यह देखकर बड़े आश्चर्य में पड़ गयी और बोली - बीरबल ! पहले तू मुझे देख कर प्रसन्न हुआ और फिर उदास हो गया ,ऐसा क्यों ? क्या तू मुझे देखकर डरता नहीं ?

बीरबल ने हाथ जोड़कर उत्तर दिया - मातेश्वरी ! आप तो जगत माता है . आपसे मुझे क्या डर ? मुझे तो इस बात का दुःख है कि आपके नासिका तो हज़ार है परन्तु हाथ दो ही है . जब हमें जाड़े में जुकाम होता है तो हम तो दो हाथों से नासिका साफ़ करते-करते परेशान हो जाते है , तब आप तो जाने किस तरह साफ़ करती होंगी .
बीरबल की बुद्धिमत्ता पूर्ण बात सुन कर दुर्गा देवी बड़ी प्रसन्न हुई और उसे संसार का सबसे बड़ा विद्वान होने का वर देकर अंतर्ध्यान हो गयीं .

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