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रणजीत कुमार
मेरी राह जो मेरी अपनी अकेली 
बताओ की,  क्या तुम मेरा साथ दोगी
जो काँटों पर चलना है मंज़ूर तुमको 

बता दूँ ये रास्ते  में तकलीफ होगी
                        कदम ही नहीं जब बढ़ाये  है हमने
                        तो कैसे बतादूँ मैं मंजिल कहाँ है
                        राही का बस काम  चलते है रहना
                        उसकी हर पहल एक खुला आसमान है
जो मन में तुम्हारे है संदेह तो फिर 
कदम न बढ़ाना, ये बईमानी होगी
लेखक स्वयं  जब कलम छोड़ दे तो
घुटन से भरी  वो कहानी ही होगी
                        चलो मेरे संग ऐसी  मेरी थी मंशा
                        मैं हूँ एक पथिक हमकदम चाहता हूँ 
                        मिलाके कदम जो चले साथ मेरे
                        कोई मित्र ऐसा  परम चाहता हूँ .

यह रचना रणजीत कुमार मिश्र द्वारा लिखी गयी है। आप एक शोध छात्र है। इनका कार्य, विज्ञान के क्षेत्र में है . साहित्य के क्षेत्र में इनकी अभिरुचि बचनपन से ही रही है . आपका उद्देश्य हिंदी व अंग्रेजी लेखनी के माध्यम से अपने भाव और अनुभवों को सामाजिक हित के लिए कलमबद्ध करना है।

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  1. रणजीत सुपुत्र
    चिरंजीव भवः
    लेखक स्वयं जब कलम छोड़ दे तो
    घुटन से भरी वो कहानी ही होगी

    सुंदर कविता
    धन्यवाद के साथ
    गुड्डोदादी चिकागो से

    उत्तर देंहटाएं
  2. Ranjeet ji
    aapki rachna mein kuch hai jo shabdon ki sashaktata se jhalak raha hai. Aapke bhav aur aapke anubhav hi aapke rahbar hai. bahut sunder abhivyakti ke liye daad

    उत्तर देंहटाएं

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