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कबीरदास
पाँच तत्व का पूतरा, मानुष धरिया नाम । 
दिना चार के कारने, फिर-फिर रोके ठाम ॥


एक बून्द के कारने, रोता सब संसार । 
अनेक बून्द खाली गये, तिनका नहीं विचार ॥


कबीर टुक-टुक चोंगता, पल-पल गयी बिहाय । 
जिव जंजाले पड़ि रहा, दियरा दममा आय ॥

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  1. बढिया जानकारी के लिए आभार ।

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  2. कबीर जी के दोहों के अर्थ समझे और आचरण करे हम सब मन तब शांत ही शांत
    नमन कबीर जी को

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