5
Advertisement
मीराबाई
दरस बिन दूखण लागे नैन।
जबसे तुम बिछुड़े प्रभु मोरे, कबहुं न पायो चैन।
सबद सुणत मेरी छतियां, कांपै मीठे लागै बैन।
बिरह व्यथा कांसू कहूं सजनी, बह गई करवत ऐन।
कल न परत पल हरि मग जोवत, भई छमासी रैन।
मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे, दुख मेटण सुख देन।

एक टिप्पणी भेजें

  1. बहुत सुन्दर मीरा बाई का भजन पढवाने के लिये हार्दिक आभार्।

    उत्तर देंहटाएं
  2. Meera ke is khoobsoorat marmik bhajan ki shabdavali ke saath agar suron ki link bhi hoti to sone pe suhaga hota...

    उत्तर देंहटाएं
  3. .•♥•.
    ░ ➽ ❥ ░ ➽ ❥╰დ╮❤╭დ╯➽ ❥ ░ ➽ ❥ ░
    █◕█.•♥•.॥श्री कृष्ण: शरणम् मम:॥.•♥•.█◕█
    ░ ➽ ❥ ░ ➽ ❥╰დ╮❤╭დ╯➽ ❥ ░ ➽ ❥ ░

    उत्तर देंहटाएं
  4. .•♥•.
    ░ ➽ ❥ ░ ➽ ❥╰დ╮❤╭დ╯➽ ❥ ░ ➽ ❥ ░
    █◕█.•♥•.॥श्री कृष्ण: शरणम् मम:॥.•♥•.█◕█
    ░ ➽ ❥ ░ ➽ ❥╰დ╮❤╭დ╯➽ ❥ ░ ➽ ❥ ░

    उत्तर देंहटाएं
  5. .•♥•.
    ░ ➽ ❥ ░ ➽ ❥╰დ╮❤╭დ╯➽ ❥ ░ ➽ ❥ ░
    █◕█.•♥•.॥श्री कृष्ण: शरणम् मम:॥.•♥•.█◕█
    ░ ➽ ❥ ░ ➽ ❥╰დ╮❤╭დ╯➽ ❥ ░ ➽ ❥ ░

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top