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विज्ञान और अध्यात्म की यात्रा अनूठी  है जहाँ विज्ञान बाहर की दुनिया के अनसुलझे रहस्य को सुलझाने  का प्रयास वहीँ अध्यात्म पहल  है चेतना की शिखर यात्रा का. मेरी ये यात्रा आश्चर्य एवं विस्मय से भरी है. नित नए अनुभव हो रहे हैं विज्ञान जहाँ ठोस सबूतों के खोज में हर चीज को तोड़ कर समझने में विश्वास रखती है वहीँ अध्यात्म एक काव्य की तरह है जो अखंडता में जीवंत हो उठती है. समग्रता में जीवन का सार निहित है और आध्यात्मिक यात्रा इसी समझ से प्रारम्भ होती है. ये यात्रा एक ऐसा सफर है जिसमे कोई और हमसफ़र नहीं होता एक निजी एवं निहायत ही व्यक्तिगत प्रयास. मन और बुद्धि से जहाँ वैज्ञानिक खोज का सम्बन्ध है वहीँ ह्रदय के सुगंध से आध्यात्मिक आविष्कार का.
जीवन सारतत्त्व  को समझने में आवश्यक है आत्मा को समझना चैतन्य को समझना एवं इस बात की समझ की मनो शरीर यंत्र से परे एक चैतन्य भी है जिसकी वैज्ञानिक व्याख्या असंभव. वैज्ञानिक एवं विचारक टी. डी. सिंह जो ISKCON से सम्बंधित हैं ने एक नए शब्द “स्पिरिटओन” की संज्ञा दी है. स्पिरिटओन संकेत है हमारे आत्मा की ओर जिसे विज्ञान की मापदंड पर परखा नहीं जा सकता ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार हम ग्रुत्वाकर्षण बल को देख नहीं सकते पर फिर भी वो सर्वदा उपस्थित है. विज्ञान की एक भूल ये है की जीव एवं पदार्थ प्रकृति के समान नियमों से संचालित हैं पर वेदांत की पृष्ठभूमि में जीवन को विखंडित नहीं किया जा सकता पदार्थ, परमाणु , अणु, रसायन में वो अखंड है. अज्ञान का ज्ञान होना आवश्यक है ताकि यात्रा का प्रारम्भ सही हो सके.
भारत चैतन्य विज्ञान के क्षेत्र में  सर्वदा अग्रिणी रहा है. शिव है या फिर शव है मेरा भी यही मानना है. शिव सूत्र भी इसी आध्यात्मिक चैतन्य को प्रकाशित करने का मानचित्र है एक महान ग्रन्थ जिसकी हर एक सूत्र हमारे अन्तः यात्रा की आधार स्तंभ. जीवन की उत्पत्ति एक रोचक विषय है हमारे ग्रन्थ ज्ञान के सागर हैं वेदांत के पृष्ठभूमि में अध्यन आवश्यक है चेतना के यात्रा में. एक ऐसी यात्रा जिसमे यात्री में प्रतिपल विस्मय का अनुभव व्याप्त होता है प्रारम्भ से मंजिल तक एक कायापलट जारी रहता है कुछ जो अव्यक्त है सहसा व्यक्त होने लगता है और अभिव्यक्त भी. मुझे ज्ञात नहीं की मैं अपनी बात आपके समक्ष रख पाया या नहीं पर इन सब बातों को व्यक्त करने का मौका दिया इसके लिए धन्यवाद.
सत्यान्वेषी  


यह रचना रणजीत कुमार मिश्र द्वारा लिखी गयी है। आप एक शोध छात्र है। इनका कार्य, विज्ञान के क्षेत्र में है . साहित्य के क्षेत्र में इनकी अभिरुचि बचनपन से ही रही है . आपका उद्देश्य हिंदी व अंग्रेजी लेखनी के माध्यम से अपने भाव और अनुभवों को सामाजिक हित के लिए कलमबद्ध करना है।

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