2
Advertisement
दीपावली निकट है. एक पारिवारिक महोत्सव  जो अन्धकार पर प्रकाश के विजय की गाथा है. अन्धकार चाहें  कितना गहरा क्यूँ न हो एक दीपक मात्र उसे विलीन  करने की छमता रखता है. हमारे  अंदर भी अन्धकार भरा है अज्ञान का जिससे संघर्ष नहीं करना बस एक ज्ञान का दीप  प्रज्वलित करना है. अज्ञान का ज्ञान होना आवश्यक है बस यह समझ संभावनाओं के द्वार खोल देता है और काल कोठरी के तरह हमारा अपना अस्तित्व रौशनी से सराबोर हो जाता है. बुद्ध ने कहा था “आपो दीपो भवः” Be a light unto yourself ये शब्द अनुभव के सागर से चुने मोती हैं जो गहन भाव लिए हैं गौतम बुद्ध के ये दर्शन की अपना दीपक स्वयं होना है एक आविष्कार है अन्तर्निहित अपार उर्जा श्रोत का जिस प्रकार बीज़ के गर्भ में विशाल वृक्ष की सम्भावना छिपी है, बस प्रकट होना है अगर उचित वातावरण का संयोग हो, ठीक उसी प्रकार हमारे अस्तित्व के केन्द्र में निहित है प्रकाश पुंज जिससे हम अनभिग्य अवश्य हैं पर यथोचित वातावरण में साक्षात्कार संभव है.
अभाव की मानसिकता हमारे मन की उपज है. लक्ष्मी की पूजा मात्र आभाव से मुक्ति नहीं बल्कि इस स्वाभाव से मुक्ति का मार्ग बने की प्रकृति में कमी है. प्रकृति में हर कुछ भरपूर है प्रचुर है हमारी जरूरतों के लिए, बस इस मनोभाव को जागृत करना है दीपावली अवसर बने धनि बनने का नहीं बल्कि सम्पन्नता के भाव का. कमी धन की नहीं आत्मविश्वास एवं नए विचारों की है एक प्रबल विचार मात्र चाहिए जो मन के उदंडता पर चोट कर सके. जीवन विरोधाभास से भरा है सुख है तो दुःख भी है पर सुख और दुःख से परे है आनंद, आनंद का कोई विपरीत शब्द नहीं उस आनंद की प्राप्ति हो इस प्रकाश पर्व पर ऐसा कामना करता हूँ. प्रार्थना में अपार शक्ति होती है हमारी प्रार्थना उस चैतन्य से की हमारे अंदर के तिमिर को प्रकाशपुंज में परिवर्तित करदे और ये समझ दे की हम अपने दीप स्वयं हो सकें.
सत्यान्वेषी  

यह रचना रणजीत कुमार मिश्र द्वारा लिखी गयी है। आप एक शोध छात्र है। इनका कार्य, विज्ञान के क्षेत्र में है . साहित्य के क्षेत्र में इनकी अभिरुचि बचनपन से ही रही है . आपका उद्देश्य हिंदी व अंग्रेजी लेखनी के माध्यम से अपने भाव और अनुभवों को सामाजिक हित के लिए कलमबद्ध करना है।

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top