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है क्षत्री भी चुप न पट्टा न बांक है
पूरी भी ख़ुश्‍क लब है कि घी छ: छटांक है।

महात्‍मा जी से मिल के देखो, तरीक़ क्‍या है, सोभाव क्‍या है
पड़ी है चक्‍कर में अक़्ल सब की बिगाड़ तो है बनाव क्‍या है

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