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जीवन जहाँ खत्म हो जाता!
उठते-गिरते,
जीवन-पथ पर
चलते-चलते,
पथिक पहुँच कर,
इस जीवन के चौराहे पर,
क्षणभर रुक कर,
सूनी दृष्टि डाल सम्मुख जब पीछे अपने नयन घुमाता!
जीवन वहाँ ख़त्म हो जाता!

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  1. वाह आपके यहां तो नीरज जी का ख़ज़ाना है.

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  2. जब आगे कार्य की कोई योजना ना रहे और बीते कार्यों के मूल्यांकन के सिवाय कोई अन्य कार्य शेष न रहे, वहाँ जीवन ठहर ही जाता है. एक गीतकार के बोल भी हैं. ....... जीवन चलने का नाम, चलते रहो सुबह-शाम.

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