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अपने जवान हुस्न का सदक़ा उतार दे दर्शन दे एक बार मुकद्दर संवार दे.
जो खिल उठें गुलाब मेरे दिल के बाग़ में रब्बा, मेरे नसीब में ऐसी बहार दे.
अच्छा तो मेरे क़त्ल में मेरा ही हाथ था  सारी तुहमतें तू मेरे सर पे मार दे.
इक जामे-बेख़ुदी की है दरकार आजकल हर ग़म को भूल जाऊँ मैं, ऐसा ख़ुमार दे.
मोहलत ज़रा सी दे मुझे लौटूं अतीत में दो चार पल के वास्ते दुनियां संवार दे.
यह  ग़ज़ल देवी नागरानी जी द्वारा लिखी गयी है . आप न्यूजर्सी(यू.एस.ए) में शिक्षिका के रूप में कार्यरत है . आपकी 'चरागे दिल ,उड़ जा पंछी,दिल से दिल तक ,लौ दर्दे दिल की तथा गम में भीगी खुशी" आदि कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी है . देवी नागरानी , हिन्दी ,सिन्धी तथा अंग्रेजी में समान रूप से साहित्यिक रचना करती हैं .  

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  1. हर इक शे'र को कई कई बार पढ़ा.......
    क्यों पढ़ा मैं नहीं जानता
    मैं इतना ही जानता हूँ कि जितनी बार पढ़ा
    उतनी बार
    दिल के भीतर कुछ नमी महसूस हुई
    इस नमी को मैं क्या नाम दूँ
    मैं नहीं जानता
    मैं बस इतना जानता हूँ
    कि ये ग़ज़ल एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल है
    और आप को इसके लिए
    दिली मुबारकबाद मिलनी चाहिए......

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  2. आदरणीया देवी नांगरानी जी ग़ज़ल के लिहाज़ से एक सुपरिचित सशक्त हस्ताक्षर हैं । आपकी ग़ज़लें महज शौकिया लेखन की उपज कदापि नहीं । इनमें विचार और दर्शन आवश्यक रूप से अंतर्निहित होता है । यही कारण है कि , देवी जी की ग़ज़लों में सहज संप्रेषणीयता के साथ सह्ज प्रभावोत्पादकता भी निश्चित रूप से होती है ।

    इक जामे-बेख़ुदी की है दरकार आजकल
    हर ग़म को भूल जाऊं मैं, ऐसा ख़ुमार दे

    जामे-बेख़ुदी के अर्थ की गहराई में जाने पर बहुत विराट अर्थ सामने आता है ।


    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  3. देवी जी
    मै रोई परदेस में, भीगा माँ का प्यार |
    छोटा करके देखा दुनियाँ का विस्तार
    आँखों भर आकाश है,
    माँ की गोद का ही मिला दुलार
    दिल ने दिल से बात की,बिन चिठ्ठी बिन तार

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  4. AApka protshan mere safar mein hamsafar rahega. Abhaar ke saath

    उत्तर देंहटाएं

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