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सपने  को हकीकत में इच्छा है बसा पाने की
आकाश  में घरोंदा
चाहत  है बनाने की
सपने  को हकीकत में 
इक्षा है बस पाने की
ये  स्वप्न है अनोखा 
न ईंट की दीवारें
न द्वार न वातायन
नीले  गगन के विस्तृत 
उस  मौन में भ्रमण  है
जहाँ  चौक न चौराहे
न साइन बोर्ड कोई 
आनंद  की गुंजाइश
गम  का अतिक्रमण है
दुनिया  भले सपनो की
अंदर  जो खलबली है
कहीं  अनायास युहीं 
सपनों से जा मिली है
गठजोड़ ये निश्चय ही
संकेत सुहाना है
आवाज़  तो उसकी है
सपनो  का बहाना है 
 

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