5
Advertisement
हिंदी जानता हूँ ,हिंदी बोलता हूँ
इस बात पर गर्व करता हूँ

मैं कितना धन्य हूँ
यह मैं ही जानता हूँ

हिंदी भाषाओं में रत्न है
यह एक कटु सत्य है

हिंदी की सेवा को,
देश सेवा समझता हूँ

इसी लिए हिंदी में लिखता हूँ

निरंतर इसके प्रसार मैं लगूंगा
इसके लिए प्रयत्न सारे करूंगा

यह मेरा प्रण है,हिंदी को नमन है


यह रचना डॉ. राजेंद्र तेला 'निरंतर'  द्वारा लिखी गयी है . आप पेशे से दन्त -चिकित्सक है तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए है. आपकी 'स्वास्थ दर्पण' एवं 'संतुलित आहार' पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है. 

एक टिप्पणी भेजें

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....
    अच्छी पंक्तिया सृजित की है आपने ........
    भाषा का सवाल सत्ता के साथ बदलता है.अंग्रेज़ी के साथ सत्ता की मौजूदगी हमेशा से रही है. उसे सुनाई ही अंग्रेज़ी पड़ती है और सत्ता चलाने के लिए उसे ज़रुरत भी अंग्रेज़ी की ही पड़ती है,
    हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं

    एक बार इसे जरुर पढ़े, आपको पसंद आएगा :-
    (प्यारी सीता, मैं यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी .....)
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html

    उत्तर देंहटाएं
  2. १४-०७-१९४९ को हिंदी को राजभाषाका सुहाग बख्शा गया तभी से बेचारी हिंदी राष्ट्रभाषा के सिन्दूर को अपनी मांग में सजाने को तरस रही है|६१ सालों के बाद भी हिंदी राज्य की ही भाषा है |केंद्र सरकार के कार्यालयों में विशेषकर उत्सव सेलेब्रेट करके प्राईज़ बांटे गए ज्यादा तर अपनों को ही बांटे गए|लेडीस एंड जेंट्स के संबोधनों से दिवस प्रारंभ हुए और टी पार्टी के बाद समाप्त हुए इसके बाद फिर[ वोही पुराना राग] अघोषित राष्ट्रभाषा अंग्रेज़ीमें सर्कुलर बांटने की लीक पीटनी शुरू हो गयी

    उत्तर देंहटाएं
  3. हिंदी को मेरा भी नमन ....

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया,


    हिन्दी के प्रचार, प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है. हिन्दी दिवस पर आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं साधुवाद!!

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top