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पाँच पूत भारतमाता के, दुश्मन था खूंखार
गोली खाकर एक मर गया,बाकी रह गये चार

चार पूत भारतमाता के, चारों चतुर-प्रवीन
देश-निकाला मिला एक को, बाकी रह गये तीन

तीन पूत भारतमाता के, लड़ने लग गये वो
अलग हो गया उधर एक, अब बाकी बच गये दो

दो बेटे भारतमाता के, छोड़ पुरानी टेक
चिपक गया है एक गद्दी से, बाकी बच गया एक

एक पूत भारतमाता का, कन्धे पर है झन्डा
पुलिस पकड कर जेल ले गई, बाकी बच गया अंडा

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  1. कमाल की तुकबंदी, सार्थकता के साथ ...

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  2. हमें गर्व है कि नागार्जुन भारत के कवि हुए. ऐसी तीखी पर सीधी कविता नागार्जुन के सिवा कौन लिख सकता है. बीहड़.

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  3. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  4. बेहतरीन ....आभार पढ़ाने के लिए

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  5. वाह बहुत खूब .इस तरह की रचना दुर्लभता से पढ़ने को मिलती है .

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  6. How relevant it looks in Today's political context Nagarjuna penned the feelings of AamAadmi

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