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एक दिन दरबार में एक कारीगर एक बहुत बढ़िया तलवार बना कर लाया . बादशाह अकबर को बड़ी पसंद आई , उन्होंने उसे कुछ देर तक हाथ में लेकर देखा और कहा - बीरबल तुम भी देखो , कह कर बीरबल को दे दी . बीरबल ने पहले तो उसे बड़ी उत्सुकता पूर्वक उलट - पलट कर देखते रहे फिर उन्होंने उसे पलट कर तथा घिसकर देखा , परन्तु ऐसा मालुम हुआ कि उनकी समझ में कुछ न आया .
बीरबल बोले - हुजूर ! गुस्ताखी माफ़ हो ! आपके पारस जैसे हाथों में आकर तलवार सोने की क्यों नहीं हुई ? यही देख रहा था . इसीलिए मैंने इसे घिसा भी था . यह बात अभी तक मेरे समझ में नहीं आई .
बीरबल का ऐसा जबाब सुनकर बादशाह बड़े प्रसन्न हुए और उन्हें वही तलवार इनाम में दे दी .

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