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उम्मीद का एक टुकड़ा
रोज़ ही डाल देती हूँ
इंतज़ार की लौ में
सुलग उठती हूँ रोज़ ही
किसी मुन्तजिर शमा की तरह..

दिन के जाते ही बिलख पड़ती है
सांझ जैसे के छोटा बच्चा हो
चाँद इसको मैं लाके दूँ कैसे
मेरा ही चाँद देखो तो कैसे
जाके बैठा है कब से सरहद पे
ताकि हो पाए मुल्क ये रौशन..

सिहर जाती हूँ आहट आहट पे
कहीं कोई सदा न ले आये
किसी सिसकी को साथ में अपने..

दिल में बस एक दुआ पलती है
जिसने कुर्बान की है अपनी ख़ुशी
सबके चेहरे पे इक सुकूं के लिए
उसकी भी ज़िन्दगी सलामत रहे
खुदा खैर करे, रब खैर करे..!!
 


यह कविता दिपाली सांगवान द्वारा लिखी गयी है .  अंतरजाल पर प्रकाशित होने वाली विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में आपकी रचना प्रकाशित हो चुकी है . आप स्वतंत्र रूप से लेखन कार्य से जुडी हुई है.


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  1. बेहद उम्दा सदा।
    कृष्ण प्रेम मयी राधा
    राधा प्रेममयो हरी


    ♫ फ़लक पे झूम रही साँवली घटायें हैं
    रंग मेरे गोविन्द का चुरा लाई हैं
    रश्मियाँ श्याम के कुण्डल से जब निकलती हैं
    गोया आकाश मे बिजलियाँ चमकती हैं

    श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये

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  2. दिन के जाते ही बिलख पड़ती है
    सांझ जैसे के छोटा बच्चा हो
    चाँद इसको मैं लाके दूँ कैसे
    मेरा ही चाँद देखो तो कैसे

    बहुत सुन्दर ...एक एक लफ्ज़ मन में उतरता हुआ ...

    जन्माष्टमी की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  3. चाँद इसको मैं लाके दूँ कैसे
    मेरा ही चाँद देखो तो कैसे
    जाके बैठा है कब से सरहद पे

    bahut pyaari panktiyaan lagin ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. चाँद इसको मैं लाके दूँ कैसे
    मेरा ही चाँद देखो तो कैसे
    जाके बैठा है कब से सरहद पे

    bahut pyaari panktiyaan lagin ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. Lafz, lafz umdaa,
    Khushbu khushbu sdaa.
    Roshan roshan soch,
    Goonjti si dua.

    Bahut badiya.....bahut hi badiya !

    Rajesh Amar.

    उत्तर देंहटाएं
  6. एक सुंदर अभिव्यक्ति...उत्तम रचना..प्रस्तुत करने के लिए आभार एवं दीपाली जी को ढेर सारी शुभकामनाएँ

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  7. एक उम्दा रचना ……………………॥बहुत सुन्दर

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  8. deepa,
    bahut gahre ehsaas, tumhari nazm padhkar aksar chaunk kar khaamosh ho jaati hun, jaise kahin mere mann ke aas paas thahar jaate hain shabd. behad sundar abhivyakti, badhai tumko.

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  9. Meri rachna ko itna sneh aur sammaan dene ke liye, Aap sabhi guni jano ka bahut bahut aabhaar.
    Deep

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  10. दिन के जाते ही बिलख पड़ती है
    सांझ जैसे के छोटा बच्चा हो
    चाँद इसको मैं लाके दूँ कैसे
    Bahut sunder...very nice thought.

    उत्तर देंहटाएं
  11. दिन के जाते ही बिलख पड़ती है
    सांझ जैसे के छोटा बच्चा हो
    चाँद इसको मैं लाके दूँ कैसे
    Bahut sunder...very nice thought.

    उत्तर देंहटाएं

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