1
Advertisement
पूछता हूँ ‘’आप गाँधी को पकड़ते क्‍यों नहीं’’
कहते हैं ‘’आपस ही में तुम लोग लड़ते क्‍यों नहीं’’।


यही मर्ज़ी ख़ुदा की थी हम उनके चार्ज में आये
सरे तस्‍लीम ख़म है जो मिज़ाजे जार्ज में आये।


ता’लीम जो दी जाती है हमें वह क्या है, फक़त बाज़ारी है
जो अक़्ल सिखाई जाती है वह क्याह है फ़कत सरकारी है।

एक टिप्पणी भेजें

  1. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top