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प्रिय मित्रों , 'हिन्दीकुंज' में रणजीत कुमार जी के स्तम्भ 'मंगलज्ञानानुभाव के अंतर्गत आज प्रस्तुत है - वो कौन चित्रकार है . यह लेख ईश्वर की पावन अभिव्यक्ति से सम्बंधित है . आशा है कि आप सभी को यह लेख पसंद आएगा. इस सन्दर्भ में आप सभी के सुझाओं की प्रतीक्षा रहेगी . 






वो  कौन चित्रकार है

ईश्वर की पावन अभिव्यक्ति संसार के कैनवास पर अपने कुची से इन्द्रधनुषी  रंगों के माध्यम मनुष्य का चित्रण. वो चित्र जो जीवंत  है कैद नहीं कैनवास की परिधि  में और असीम संभावनाओं  को लिए सक्षम नए मनोरम  दृश्य के निर्माण का. पर अदृश्य अव्यक्त कोरे पृष्टभूमि पर क्या व्यक्त कर रहे हैं हम घृणा, द्वेष, कुंठा, असंतोष और आधुनिक कला के नाम पर पोत रहे हैं कालिख अस्तित्व के आनंद पर. कौन समझे इस गुढ़ रहस्य को की दृश्य, द्रष्टा , दृष्टीकोण तीन पृथक विचार मात्र हैं पर उनके पीछे बस और बस व्यक्त है ईश्वरीय आनंद. वो कौन चित्रकार है जो ऐसे अद्भूत चित्र बनाता है की वो चित्र नए चित्र बना सके उस कलाकार को मेरा कोटि कोटि प्रणाम. दृश्य द्रष्टा दृष्टीकोण की दुनिया में आपका स्वागत जहाँ चित्र चित्रकार और उसकी रचना तीनो का अद्भूत समागम होता है संसार के विस्तृत कैनवास पर. तो निश्चय ही आप और हम अलग नहीं श्रोत एक है हम सभी चित्र हैं उसी चित्रकार के जिसकी हर कृति उत्कृष्टतम है. आइये हम हर संभव प्रयास करें की हमारी रचना भी मलीन न हो और पवित्र श्रृंखला बने उसी सृजनहार का जिसकी हम व्यक्त स्वरुप हैं.









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