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चानन भेल विषम सर रे, भुषन भेल भारी।
सपनहुँ नहि हरि आयल रे, गोकुल गिरधारी।।
एकसरि ठाठि कदम-तर रे, पछ हरेधि मुरारी।
हरि बिनु हृदय दगध भेल रे, झामर भेल सारी।।
जाह जाह तोहें उधब हे, तोहें मधुपुर जाहे।
चन्द्र बदनि नहि जीउति रे, बध लागत काह।।
कवि विद्यापति गाओल रे, सुनु गुनमति नारी।
आजु आओत हरि गोकुल रे, पथ चलु झटकारी।।


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  1. बहुत सुन्दर अभिब्यक्ति| धन्यवाद|

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  2. अति सुन्दर!! किन्तु टंकण सऽ संबंधित किछु त्रुटि अछि, यथा...
    ’ठाठि’ के स्थान पर ’ठाढि’कयल जाउ।

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