1
Advertisement
जाने वो कैसे लोग थे, जिनके प्यार को प्यार मिला ? हमने तो जब कलियाँ मांगीं, काँटों का हार मिला ॥

खुशियों की मंज़िल ढूंढी तो ग़म की गर्द मिली
चाहत के नग़में चाहे तो आहें सर्द मिलीं
दिल के बोझ को दूना कर गया, जो ग़म्ख़्वार मिला

बिछड़ गया हर साथी दे कर, पल-दो-पल का साथ
किसको फ़ुरसत है जो थामे, दीवानों का हाथ
हम को अपना साया तक अक्सर बेज़ार मिला

इसको ही जीना कहते हैं तो यूँ ही जी लेंगे
उफ़ न करेंगे, लब सीलेंगे, आँसू पी लेंगे
ग़म से अब घबराना कैसा, ग़म सौ बार मिला

एक टिप्पणी भेजें

  1. एक सुंदर रचना पढ़वाने के लिए आभार वर्ना अभी तक तो इसे सुनते ही आए थे.

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top