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कर कानन कुंडल मोरपखा उर पै बनमाल बिराजती है ,
मुरली कर में अधरा मुस्कान तरंग महाछबि छाजती है .
रसखान लखै तन पीतपटा सत दामिनी की दुति लाजती है ,
वह बाँसुरी की धुनी कानि परे कुलकानि हियो तजि भाजती है.

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