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तुम हो जीवन के पथदर्शक,
तुम हो जीने का आधार,
तुम्हारी छाया ही जीवन में,
बन गयी जीने का आसार।

मात पिता के प्यार का अहसास,
तुमने ही कराया है,
हे दोस्त मेरा जीवन अब तुम पर ही,
न्योछावर होने आया है।

मैं काम, क्रोधी, लोभी व आलशी,
परिचायक इनका कहलाता था,
तुमने ही मेरे जीवन को इन तत्वों से,
अंधकार मुक्त कराया है।

चाँद कि विलोम तुम सूरज जैसे,
पश्चिम कहें तो पूरब जैसे,
जिन पर तुम्हारी छाया है,
उन्होंने हर सुख पाया है।

सुख दुःख के साथी तुम हो,
तुम हो हर गुण का आधार,
तुमने ही एस मूरख को,
अतुलित दिया है प्यार।

प्रभु जैसे ही रूप मे, मै आपको,
देखते आया हूँ,
स्वीकार करो मेरी इस "दोस्ती" को,
मै झोली फैलाकर कर लाया हूँ।

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  1. deepak sir aap ne bhavon ko bahut hi achhe dhang se piroya hai.

    उत्तर देंहटाएं
  2. suprabhat deepak sir-


    aapke bhav baht achhe hai, age bhi hame apne aise hi bhavo se ot prot karte rahiyega.
    - Sangharsh

    उत्तर देंहटाएं
  3. suprabhat deepak sir-

    aap k bhav bahut hi achhe hain, aur age bhi aap hame isi tarah k bhavon se ot prot karte rahiyega.
    Dhanywad

    SANGHARSH

    उत्तर देंहटाएं
  4. भाई ये कविता किस्तों समर्पित है भगवान को फिर दोस्त को " चाहे किसी को भी समर्पित हो काफी अच्छी कविता है यार ! हमारी यही कमाना है की तुम इस तरह का संकलन बनाकर एक दिन शोहरत की
    बुलंदियों पर छा जाओ ये हमारी हार्दिक कामना है "

    (कमल चन्द्र भट्ट )

    उत्तर देंहटाएं
  5. भाई ये कविता किस्तों समर्पित है भगवान को फिर दोस्त को " चाहे किसी को भी समर्पित हो काफी अच्छी कविता है यार ! हमारी यही कमाना है की तुम इस तरह का संकलन बनाकर एक दिन शोहरत की
    बुलंदियों पर छा जाओ ये हमारी हार्दिक कामना है "

    (कमल चन्द्र भट्ट )

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  6. आप सभी लोगो को बहुत बहुत धन्यबाद मुझे प्रोत्साहित करने के लिए. हाँ मनीष जी मैं जरुर कोशिश करूँगा कि अपनी भावनाओ को शब्दों मैं पिरो सकू.

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  7. deepak g m aapki kavita pahle padh ni paya. ab padhi h yaar bhut accha laga 'atisundar'.

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  8. yar aapne bhut achhi poem likhi hai yar bhut achha lga yar mujhe..........

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