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अकबर बादशाह ने एक पुस्तक लिखकर छपवाई थी. बादशाह उसे बहुत ही सुन्दर पुस्तक समझते थे. एक दिन बीरबल ने कहा - हुजूर ! आपने बड़ी कमाल की पुस्तक लिखी है . आज मैंने घीसा हलवाई के पास देखी थी. बादशाह ने पूछा - उसने पूरी पढ़ी थी ? क्या कहता था वह ? बीरबल ने कहा - हुजूर ! पढता न था ,वह तो उसमे चमचम बाँधकर  बेचता है. इस पर बादशाह को बड़ी खिसियाहट हुई और उन्होंने सब पुस्तक इकट्ठी करवा कर अग्निदेव को भेंट कर दी.

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