1
वो  कौन चित्रकार है - मंगल ज्ञानानुभाव
वो कौन चित्रकार है - मंगल ज्ञानानुभाव

प्रिय मित्रों , 'हिन्दीकुंज' में रणजीत कुमार जी के स्तम्भ 'मंगलज्ञानानुभाव के अंतर्गत आज प्रस्तुत है - वो कौन चित्रकार है . यह ल...

और जानिएं »

0
अब मैं नाच्यौ बहुत गुपाल - सूरदास के पद
अब मैं नाच्यौ बहुत गुपाल - सूरदास के पद

राग घनाक्षरी अब मैं नाच्यौ बहुत गुपाल। काम-क्रोध कौ पहिरि चोलना, कंठ बिसय की माल॥ महामोह के नूपुर बाजत, निंदा सबद रसाल। भ्रम-भोयौ मन भयौ...

और जानिएं »

0
हिन्‍दोस्‍ताँ के वास्‍ते - जोश मलीहाबादी
हिन्‍दोस्‍ताँ के वास्‍ते - जोश मलीहाबादी

मज़हबी इख़लाक़ के जज़्बे को ठुकराता है जो आदमी को आदमी का गोश्‍त खिलवाता है जो फर्ज़ भी कर लूँ कि हिन्‍दू हिन्‍द की रुसवाई है लेक...

और जानिएं »

1
गुरु गोविन्द दोनों खड़े - कबीरदास के दोहे
गुरु गोविन्द दोनों खड़े - कबीरदास के दोहे

गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागूं पाँय । बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय ॥ बलिहारी गुरु आपनो, घड़ी-घड़ी सौ सौ बार । मानुष से देवत ...

और जानिएं »

1
खुले बाजार में आंखें खोल कर चलें - मनोज सिंह
खुले बाजार में आंखें खोल कर चलें - मनोज सिंह

अधिक पुरानी बात नहीं है जब वॉल स्ट्रीट धराशायी हुआ था। विश्व अर्थव्यवस्था की चर्चा करने वालों के बीच दहशत फैल गई थी। ऐसे में, कौन-सी दीवार ग...

और जानिएं »

1
जाने वो कैसे लोग थे - साहिर लुधियानवी
जाने वो कैसे लोग थे - साहिर लुधियानवी

जाने वो कैसे लोग थे, जिनके प्यार को प्यार मिला ? हमने तो जब कलियाँ मांगीं, काँटों का हार मिला ॥ खुशियों की मंज़िल ढूंढी तो ग़म की गर्द मिल...

और जानिएं »

3
'राष्ट्रवाणी' : कवि महेंद्रभटनागर विशेषांक : 2010
'राष्ट्रवाणी' : कवि महेंद्रभटनागर विशेषांक : 2010

'राष्ट्रवाणी' : कवि महेंद्रभटनागर विशेषांक : 2010 ॰ 'महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा, पुणे' ने अपनी द्वि - मासिक पत्रिका 'राष...

और जानिएं »

0
कोई कहियौ रे प्रभु आवन की - मीरा बाई के पद
कोई कहियौ रे प्रभु आवन की - मीरा बाई के पद

कोई कहियौ रे प्रभु आवन की, आवनकी मनभावन की। आप न आवै लिख नहिं भेजै , बाण पड़ी ललचावन की। ए दोउ नैण कह्यो नहिं मानै, नदियां बहै जैसे साव...

और जानिएं »

0
कर कानन कुंडल मोरपखा - रसखान
कर कानन कुंडल मोरपखा - रसखान

कर कानन कुंडल मोरपखा उर पै बनमाल बिराजती है , मुरली कर में अधरा मुस्कान तरंग महाछबि छाजती है . रसखान लखै तन पीतपटा सत दामिनी की दुति लाजती...

और जानिएं »

22
‘‘बिन ब्याही माँ’’ - नीरज तोमर की कहानी
‘‘बिन ब्याही माँ’’ - नीरज तोमर की कहानी

उसका सारा सामान मुश्किल से एक ठेले भर था। शायद वो सामान उस छोटे से कमरे में भरने के पश्चात् भी उस कमरे में एक बड़े सन्दूक की जगह बची रह जाय...

और जानिएं »

2
जसोदा हरि पालनैं झुलावै - सूरदास के पद
जसोदा हरि पालनैं झुलावै - सूरदास के पद

राग घनाक्षरी जसोदा हरि पालनैं झुलावै। हलरावै दुलरावै मल्हावै जोइ सोइ कछु गावै॥ मेरे लाल को आउ निंदरिया काहें न आनि सुवावै। तू काहै नहिं ...

और जानिएं »

0
विचारों की निर्जला - मंगल ज्ञानानुभाव
विचारों की निर्जला - मंगल ज्ञानानुभाव

प्रिय मित्रों ,हिन्दीकुंज में रणजीत कुमार जी  के स्तम्भ 'मंगलज्ञानानुभाव' के अंतर्गत आज प्रस्तुत है - विचारों की निर्जला . यह लेख वि...

और जानिएं »

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

'हिंदीकुंज' के पाठकों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

और जानिएं »

0
पर्वत यात्रा - प्रेमचंद की कहानी
पर्वत यात्रा - प्रेमचंद की कहानी

प्रात:काल मुं. गुलाबाजखां ने नमाज पढ़ी, कपड़े पहने और महरी से किराये की गाड़ी लाने को कहा। शीरी बेगम ने पूछा—आज सबेरे-सबेरे कहां जाने का इर...

और जानिएं »

4
साईं इतना दीजिये - कबीर के दोहे
साईं इतना दीजिये - कबीर के दोहे

साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय । मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय ॥ सुमरण से मन लाइए, जैसे पानी बिन मीन । प्राण तजे बिन बिछड़े, ...

और जानिएं »

0
मै तो सांवरे के रंग राची - मीरा बाई के पद
मै तो सांवरे के रंग राची - मीरा बाई के पद

मै तो सांवरे के रंग राची। साजि सिंगार बांधि पग घुंघरू, लोक-लाज तजि नाची।। गई कुमति, लई साधुकी संगति, भगत, रूप भै सांची। गाय गाय हरिके गुण...

और जानिएं »

1
बाग में बैठी हुई लड़की - शेखर मल्लिक की कविता
बाग में बैठी हुई लड़की - शेखर मल्लिक की कविता

बाग में बैठी हुई लड़की के इर्द-गिर्द की पूरी दुनिया गुम है उसके लिए बस लड़की है और वो बैठी है... लड़की चुप है या कुछ बोल रही है कोई नहीं सु...

और जानिएं »

1
अभागन 'धरती माँ '  - मनीष कुमार पाठक ' संघर्ष'
अभागन 'धरती माँ ' - मनीष कुमार पाठक ' संघर्ष'

वो कहते हैं न कि जहाँ चाह है वहां राह है तो वास्तव में इस धरती के बुद्धजीवी मानवों ने वो कर दिखाया | हाय ! ये धरती, ये आकाश क्या हो गया  इन्...

और जानिएं »

0
तुम आए हो - सुमन ‘मीत’
तुम आए हो - सुमन ‘मीत’

कुछ दिनों से मेघ कुछ ज्यादा ही प्रसन्न दिखाई दे रहे हैं ........बस निर्झर बहते ही जा रहे हैं साथ में मतवाली धुन्ध जब अलमस्त हिरनी सी चाल मे...

और जानिएं »
 
 
Top